"चतुर बीरबल और जादुई छड़ी - बीरबल ने कैसे अपनी बुद्धि से एक चोर को पकड़ा? पढ़िए अकबर-बीरबल की यह मजेदार और शिक्षाप्रद कहानी जो बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आएगी।"
चतुर बीरबल और जादुई छड़ी: चोर की पकड़
अकबर के दरबार के सबसे बुद्धिमान सलाहकार बीरबल अपनी चतुराई के लिए विश्व प्रसिद्ध थे। क्या एक मामूली लकड़ी की छड़ी किसी चोर का राज खोल सकती है? आइए जानते हैं इस मजेदार किस्से में।
मोतियों का बटुआ और परेशान व्यापारी
एक बार एक अमीर व्यापारी बेहद परेशान होकर बीरबल के पास पहुँचा। उसने दुख भरे स्वर में कहा, "बीरबल जी, मेरे घर में सात वफादार नौकर हैं, लेकिन उनमें से किसी एक ने मेरे मोतियों से भरा कीमती बटुआ चुरा लिया है। मैंने बहुत कोशिश की, पर चोर का पता नहीं चला। कृपया मेरी मदद कीजिए!"
बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, "घबराइए मत सेठ जी, चोर आज शाम तक सलाखों के पीछे होगा।"
बीरबल की 'जादुई' तरकीब
बीरबल उस अमीर आदमी के घर पहुँचे और सातों नौकरों को एक कतार में खड़ा कर दिया। उन्होंने अपने थैले से सात लकड़ी की छड़ियाँ निकालीं। वे सभी छड़ियाँ लंबाई में बिल्कुल एक समान थीं।
बीरबल ने हर नौकर को एक-एक छड़ी थमाते हुए गंभीर स्वर में कहा:
"ध्यान से सुनो! ये कोई साधारण लकड़ियाँ नहीं हैं, ये जादुई छड़ियाँ हैं। आज रात तुम सब इन्हें अपने पास रखोगे। तुममें से जिसने भी चोरी की होगी, उसकी छड़ी कल सुबह तक 'जादू' से ठीक एक इंच बढ़ जाएगी।"
चोर का डर और उसकी चालाकी
सातों नौकर अपनी-अपनी छड़ी लेकर अपने कमरों में चले गए। असली चोर बहुत घबराया हुआ था। उसे बीरबल की बात पर पूरा यकीन था। उसने सोचा— "अगर कल सुबह मेरी छड़ी एक इंच बड़ी निकली, तो मैं पकड़ा जाऊँगा। क्यों न मैं अभी इसे एक इंच काट दूँ? जब यह रात में बढ़ेगी, तो बढ़कर फिर से उतनी ही हो जाएगी जितनी दूसरों की है!"
चोर ने तुरंत एक आरी ली, अपनी छड़ी को एक इंच छोटा किया और चैन की नींद सो गया।
न्याय का दिन
अगली सुबह बीरबल फिर से वहाँ पहुँचे। उन्होंने एक-एक करके सभी नौकरों की छड़ियाँ जाँचीं। छह नौकरों की छड़ियाँ बराबर थीं, लेकिन एक नौकर की छड़ी एक इंच छोटी थी।
बीरबल ने तुरंत उस नौकर की ओर इशारा किया और बोले, "यही है वो चोर!"
व्यापारी हैरान था। उसने पूछा, "बीरबल जी, आपने तो कहा था कि छड़ी बढ़ जाएगी, लेकिन इसकी तो छोटी हो गई?"
बीरबल ने जवाब दिया, "सेठ जी, कोई भी लकड़ी जादू से बढ़ नहीं सकती। मैंने बस इस चोर के मन में डर पैदा किया था। अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से इसने खुद ही छड़ी काट दी और अपना जुर्म साबित कर दिया।"
पकड़े जाने पर नौकर ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और मोतियों का बटुआ लौटा दिया। बीरबल की चतुराई ने एक बार फिर न्याय कर दिखाया।
कहानी की सीख (The Moral)
"अपराध करने वाला व्यक्ति हमेशा डर के साये में रहता है। वह अपनी गलती छिपाने की कोशिश में अक्सर ऐसी भूल कर बैठता है जिससे उसका राज खुल जाता है। सच ही कहा गया है— 'चोर की दाढ़ी में तिनका'।"

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