चुहिया की बेटी का विवाह: सर्वशक्तिमान की खोज
क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में सबसे शक्तिशाली कौन है? एक माँ अपनी बेटी के लिए सर्वश्रेष्ठ वर ढूँढने निकली, लेकिन उसकी खोज जहाँ से शुरू हुई थी, वहीं आकर खत्म हुई।
सर्वश्रेष्ठ की तलाश
एक चुहिया की एक बहुत ही सुंदर बेटी थी। वह अपनी बेटी का विवाह दुनिया के सबसे शक्तिशाली प्राणी से करना चाहती थी। उसने सोचा, "सूर्य देव से अधिक तेजस्वी और शक्तिशाली कौन हो सकता है? वे पूरी दुनिया को प्रकाशित करते हैं।"
वह सूर्य देव के पास पहुँची, लेकिन सूर्य देव ने विनम्रता से कहा— "माता, मैं सबसे शक्तिशाली नहीं हूँ। बादल मुझसे अधिक बलवान हैं, जो मुझे ढँक कर मेरा प्रकाश रोक देते हैं।"
शक्ति की एक लंबी श्रृंखला
चुहिया फिर एक-एक करके प्रकृति की महान शक्तियों के पास गई:
बादल (वरुण देव): उन्होंने कहा, "मैं तो वायु (हवा) के सामने बेबस हूँ, जो मुझे पल भर में कहीं भी उड़ा ले जाती है।"
वायु देव: उन्होंने कहा, "पर्वतराज मुझसे भी श्रेष्ठ हैं, क्योंकि वे अडिग खड़े रहकर मेरा रास्ता रोक देते हैं।"
पर्वतराज: जब चुहिया पर्वत के पास पहुँची, तो पर्वतराज ने मुस्कुराते हुए एक बड़ा सच बताया— "मुझसे अधिक शक्तिशाली तो नन्हा चूहा है, जो अपने पैने दांतों से मेरे कठोर शरीर में छेद कर बिल बना देता है।"
सच्चाई का अहसास
पर्वतराज की बात सुनकर चुहिया की आँखें खुल गईं। उसे अहसास हुआ कि जिसे वह साधारण समझ रही थी, वही सबसे शक्तिशाली निकला। अंत में, वह मूषकराज (चूहों के राजा) के पास गई। मूषकराज ने सहर्ष प्रस्ताव स्वीकार किया और धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ।
कहानी की सीख (The Moral)
"दूर के ढोल सुहावने लगते हैं।"
भावार्थ: हम अक्सर दूसरों की स्थिति या बाहरी शक्तियों को खुद से बेहतर समझते हैं, लेकिन अंत में अपनी जड़ों और अपनी प्रकृति (Nature) में ही हमें सबसे अधिक सुख और सामर्थ्य मिलता है।

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