राजकुमारी डेलाइट और दलदल की परी
पढ़िए राजकुमारी डेलाइट की जादुई कहानी, जिसे दलदल की परी ने श्राप दिया था। जानें कैसे राजकुमार एडवर्ड की निस्वार्थ भलाई ने सूरज की पहली किरण से उसका मिलन कराया।
राजकुमारी डेलाइट और दलदल की परी
एक ऐसे राज्य में जहाँ बच्चों के जन्म पर परियाँ उनका भविष्य बताने आती थीं, राजकुमारी डेलाइट का जन्म हुआ। जंगल की छह परियाँ उसे आशीर्वाद देने पहुँचीं, लेकिन वहीं एक दुष्ट और स्वार्थी दलदल की परी भी रहती थी जो दूसरों की खुशी से जलती थी।
दलदल की परी का श्राप
नेकदिल परियों ने राजकुमारी को साहस, बुद्धिमानी और सम्मान का आशीर्वाद दिया। तभी दलदल की परी ने प्रकट होकर श्राप दिया:
"जब तक सूरज की रोशनी रहेगी, राजकुमारी सोती रहेगी। वह कभी दिन का उजाला नहीं देख पाएगी।" परियों में से एक, जो छिपी हुई थी, उसने बाहर आकर इस श्राप को थोड़ा कम किया। उसने कहा कि राजकुमारी रात में चाँद की रोशनी में जाग सकेगी, लेकिन उसकी खुशी चाँद की कलाओं से जुड़ी होगी। जैसे-जैसे चाँद बढ़ेगा (पूर्णिमा तक), वह स्वस्थ और खुश रहेगी, लेकिन जैसे ही चाँद घटेगा (अमावस्या तक), वह कमजोर और पीली पड़ती जाएगी।
राजकुमार एडवर्ड से मुलाकात
20 साल बीत गए। राजकुमारी ने कभी सूरज नहीं देखा था। अपनी बीमारी और परिवार की उदासी से बचने के लिए वह जंगल के एक छोटे घर (कॉटेज) में रहने लगी।
उसी दौरान, राजकुमार एडवर्ड, जो अपने पिता का राज्य छिन जाने के कारण जंगल में भटक रहा था, वहाँ पहुँचा। उसे एक दयालु परी ने राह दिखाई और कहा— "भलाई का एक पल दुनिया के सबसे बड़े जादू से भी ताकतवर होता है।"
श्राप का अंत
पूर्णिमा की रात राजकुमार ने चाँद की रोशनी में एक खूबसूरत अप्सरा (डेलाइट) को गाते सुना और उसे दिल दे बैठा। लेकिन अमावस्या करीब आने पर राजकुमारी गायब हो गई। राजकुमार उसे ढूंढते हुए जंगल के अंधेरे कोने में पहुँचा, जहाँ उसने एक बहुत ही वृद्ध और बीमार महिला को देखा (जो असल में अमावस्या के कारण कमजोर हुई राजकुमारी थी)।
राजकुमार ने उस बूढ़ी औरत का दर्द कम करने के लिए करुणा से भरकर उसके हाथों को चूम लिया। राजकुमार की इस निस्वार्थ भलाई ने दलदल की परी के जादू को तोड़ दिया। दलदल की परी का श्राप था कि कोई उसे पहचान कर न चूम पाए, लेकिन राजकुमार ने उसे राजकुमारी समझकर नहीं, बल्कि एक दुखी इंसान समझकर उसकी मदद की थी।
एक नई सुबह
श्राप टूटते ही राजकुमारी अपने असली रूप में आ गई और तभी सूर्योदय हुआ। अपनी ज़िंदगी में पहली बार राजकुमारी ने सूरज की पहली किरण देखी। नेक परियों ने दलदल की परी को हमेशा के लिए दूर भेज दिया जहाँ वह किसी को नुकसान न पहुँचा सके।
राजकुमार एडवर्ड ने अपना राज्य वापस पाया और राजकुमारी डेलाइट के साथ विवाह किया। वे दोनों ताउम्र हर सुबह सूरज को साथ उगते देखते रहे।
कहानी का सार (Moral)
"निस्वार्थ भाव से किया गया भलाई का एक छोटा सा काम भी बड़े से बड़े संकट या बुराई को खत्म कर सकता है। प्रेम और करुणा की शक्ति अजेय है।"

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