नन्हीं माचिस वाली मैरी की कहानी
पढ़िए नन्हीं माचिस वाली मैरी की हृदयस्पर्शी कहानी। कैसे कड़कड़ाती ठंड में माचिस की तीलियों ने उसे सपनों की एक जादुई दुनिया की सैर कराई।
मैरी: नन्हीं माचिस वाली और उसके सुनहरे सपने
नए साल की पूर्व संध्या थी। जहाँ पूरा शहर रोशनी, संगीत और लजीज पकवानों के जश्न में डूबा था, वहीं नन्हीं मैरी बर्फीली सड़क के किनारे नंगे पैर चल रही थी। उसके पास बेचने के लिए माचिस के कुछ बंडल थे, जिन्हें सुबह से किसी ने नहीं खरीदा था।
भूख और मजबूरी का संघर्ष
मैरी के घर के हालात बहुत खराब थे। उसके जालिम पिता ने उसे सख्त हिदायत दी थी कि जब तक सारी माचिस न बिक जाएँ, वह घर न लौटे। मैरी ने ठंड से बचने के लिए अपनी माँ की पुरानी चप्पलें पहनी थीं, लेकिन सड़क पार करते समय एक चप्पल गटर में गिर गई और दूसरी कोई लड़का उठा ले गया। अब उसके नन्हे पैर बर्फ की तरह जम चुके थे।
माचिस की तीलियाँ और जादुई दुनिया
हार मानकर मैरी दो मकानों के बीच एक कोने में दुबक कर बैठ गई। ठंड इतनी बढ़ गई थी कि उसने हिम्मत जुटाकर एक तीली जलाई।
पहली तीली: जलते ही मैरी को लगा कि वह एक बड़े लोहे के गर्म स्टोव के सामने बैठी है। उसे कुछ गर्माहट मिली, लेकिन तीली बुझते ही स्टोव गायब हो गया।
दूसरी तीली: जब उसने दूसरी तीली जलाई, तो दीवार पारदर्शी हो गई। उसे एक अमीर घर का डाइनिंग टेबल दिखा जहाँ शानदार केक और बतख का मांस रखा था। पर हाथ बढ़ाते ही रोशनी बुझ गई।
तीसरी तीली: आसमान से एक तारा गिरते देख मैरी को अपनी स्वर्गवासी दादी की याद आई। उसने एक और तीली जलाई और इस बार उसकी प्यारी दादी माँ उसके सामने खड़ी थीं।
दादी का आंचल और आखिरी सफर
मैरी जानती थी कि तीली बुझते ही दादी भी गायब हो जाएँगी। इसलिए उसने पागलों की तरह एक साथ कई तीलियाँ जला दीं। चारों ओर सूरज जैसी रोशनी फैल गई। दादी ने मुस्कुराते हुए मैरी को अपनी गोद में उठा लिया। अब मैरी को न तो ठंड लग रही थी, न भूख और न ही अपने पिता का डर। वह अपनी दादी के साथ उस दुनिया में चली गई जहाँ केवल शांति और प्यार था।
अगली सुबह, सूरज की पहली किरण के साथ लोगों ने मैरी को उसी कोने में बैठा पाया। उसके चेहरे पर एक अलौकिक मुस्कान थी और आसपास जली हुई तीलियाँ बिखरी थीं। लोगों ने दुख जताते हुए कहा, "बेचारी खुद को गर्म रखने की कोशिश कर रही थी," लेकिन कोई नहीं जानता था कि वह अपनी अंतिम रात में कितने खूबसूरत सपने देख कर गई थी।

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