"चतुर खरगोश - कैसे एक छोटे से खरगोश ने अपनी बुद्धि से जंगल के राजा शेर का अंत किया? पढ़िए पंचतंत्र की यह अमर कहानी जो हमें बुद्धि का महत्व सिखाती है।"
चतुर खरगोश: जब नन्ही सी बुद्धि ने दी विशाल शक्ति को मात
क्या केवल शारीरिक बल से ही युद्ध जीते जाते हैं? खरगोश और शेर की यह प्राचीन कहानी गवाह है कि सही समय पर लिया गया एक बुद्धिमानी भरा फैसला किसी भी संकट को जड़ से खत्म कर सकता है।
जंगल का आतंक और समझौता
एक वन में एक क्रूर शेर रहता था, जिसने सभी जानवरों का जीना मुश्किल कर रखा था। हार मानकर जानवरों ने एक समझौता किया—हर दिन एक जानवर खुद शेर के पास उसका भोजन बनने जाएगा। एक दिन बारी आई नन्हे से खरगोश की। खरगोश डरपोक नहीं, बल्कि बहुत चतुर था। उसने सोचा कि मरने से बेहतर है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।
शेर का क्रोध और खरगोश का जाल
खरगोश जानबूझकर बहुत देर से शेर की गुफा पहुँचा। भूख से तड़प रहा शेर दहाड़ा— "इतनी देर क्यों की? अब मैं तुम्हें तो खाऊँगा ही, साथ ही कल पूरे जंगल का विनाश कर दूँगा!"
खरगोश ने हाथ जोड़कर कहा— "महाराज, इसमें मेरा कोई दोष नहीं। रास्ते में मुझे एक और बलवान शेर मिला था। उसने दावा किया कि वह इस जंगल का असली राजा है और मुझे खाने की कोशिश की। मैं तो बड़ी मुश्किल से जान बचाकर आपके पास संदेश देने आया हूँ।"
कुएँ का 'दूसरा' शेर
अपने इलाके में दूसरे शेर की बात सुनकर असली शेर गुस्से से पागल हो गया। उसने तुरंत उस प्रतिद्वंद्वी को खत्म करने का निश्चय किया। खरगोश उसे एक गहरे कुएँ के पास ले गया और बोला— "महाराज, वह कायर इसी किले (कुएँ) के भीतर छिपा बैठा है।"
जैसे ही शेर ने कुएँ के शांत पानी में झाँका, उसे अपनी ही परछाईं (Reflection) दिखाई दी। उसने उसे ही दूसरा शेर समझ लिया। जब शेर ने कुएँ की तरफ दहाड़ा, तो पानी की गूँज से उसे वापस अपनी ही दहाड़ सुनाई दी। उसे लगा कि सामने वाला शेर उसे चुनौती दे रहा है।
क्रोध में विनाश
बिना सोचे-समझे, अपनी ताकत के अहंकार में चूर शेर ने कुएँ के अंदर छलांग लगा दी। पानी गहरा था और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। कुछ ही पलों में दुष्ट शेर का अंत हो गया और खरगोश खुशी-खुशी जंगल वापस लौट आया।
कहानी की सीख (The Moral)
"बुद्धि ताकत से बड़ी होती है।"
भावार्थ: बल का प्रयोग केवल शरीर को झुका सकता है, लेकिन बुद्धि बड़े-से-बड़े साम्राज्य और संकटों को जड़ से उखाड़ फेंकने की क्षमता रखती है। कठिन समय में धैर्य और विवेक ही हमारे सबसे बड़े हथियार होते हैं।
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