नाग और चीटियाँ: घमंड का घातक अंत
क्या आकार में बड़ा होना ही शक्तिशाली होने की निशानी है? यह कहानी एक विशाल नाग की है, जिसने नन्हीं चीटियों को कमज़ोर समझने की भूल की और अपनी जान से हाथ धो बैठा।
नागराज का बढ़ता घमंड
एक जंगल में एक विशाल नाग रहता था। वह रोज़ छोटे-छोटे जानवरों का शिकार करता और दिन भर सुस्ती से पड़ा रहता। भरपूर भोजन मिलने के कारण वह बहुत मोटा और तगड़ा हो गया था। शरीर के साथ-साथ उसका घमंड भी बढ़ता गया। उसे लगने लगा कि वह जंगल का सबसे शक्तिशाली जीव है और उसे किसी आलीशान स्थान पर रहना चाहिए।
उसने रहने के लिए एक ऊँचे पेड़ का चुनाव किया, जिसकी जड़ के पास चींटियों की एक बाँबी (बिल) थी। नाग को चींटियों का वहाँ होना अपनी शान के खिलाफ लगा।
नन्हीं चींटियों को चुनौती
नाग ने गुस्से में फुफकारते हुए कहा, "मैं इस जंगल का राजा हूँ! ए तुच्छ चींटियों, यहाँ से यह कूड़ा हटाओ और तुरंत भाग जाओ। मुझे यहाँ सफाई चाहिए!"
पास के अन्य जानवर तो नाग की फुफकार से डरकर भाग गए, लेकिन चींटियों ने अपना काम जारी रखा। उन्हें चुप देखकर नाग का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने अपनी भारी पूँछ से चींटियों के घर पर ज़ोरदार प्रहार किया और उनका घर तहस-नहस कर दिया।
एकता की जीत और अहंकार का अंत
चींटियों को अपने घर का विनाश देख बहुत क्रोध आया। देखते ही देखते हज़ारों-लाखों चींटियाँ अपने बिल से बाहर निकल आईं। वे बिजली की गति से नाग के विशाल शरीर पर चढ़ गईं और उसे हर तरफ से काटने लगीं।
नाग को ऐसा महसूस हुआ जैसे उसके शरीर पर हज़ारों जलती हुई सुइयाँ एक साथ चुभाई जा रही हों। उसने पूँछ पटकी, ज़मीन पर लोटा और बहुत छटपटाया, लेकिन चींटियों की संख्या इतनी अधिक थी कि वह उनसे पार नहीं पा सका। अंत में, उस विशाल और घमंडी नाग ने अत्यधिक पीड़ा के कारण तड़प-तड़पकर अपने प्राण त्याग दिए।
कहानी की सीख (The Moral)
"किसी को भी छोटा या कमज़ोर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। संगठन और एकता में वह शक्ति है जो बड़े से बड़े अहंकारी का विनाश कर सकती है।"

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