बारहसिंगे के सींग और पाँव: सुंदरता बनाम उपयोगिता
अक्सर हम उन चीज़ों की कद्र नहीं करते जो हमारे लिए सबसे अधिक उपयोगी होती हैं। यह कहानी एक ऐसे बारहसिंगे की है जिसे अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था, लेकिन अंत में उसी सुंदरता ने उसे मौत के मुँह में धकेल दिया।
प्रतिबिंब और पछतावा
एक बार एक बारहसिंगा नदी के किनारे अपनी प्यास बुझा रहा था। पानी के शांत दर्पण में उसने अपना प्रतिबिंब देखा। अपने फैले हुए, घुमावदार और शानदार सींगों को देखकर उसका सीना गर्व से चौड़ा हो गया। उसने सोचा, "वाह! प्रकृति ने मुझे कितना सुंदर मुकुट दिया है।"
तभी उसकी नज़र अपने पतले और सूखे पैरों पर पड़ी। वह उदास हो गया और सोचने लगा, "ईश्वर ने मेरे साथ कितना अन्याय किया है। इतने सुंदर सिर के नीचे इतने भद्दे और कमज़ोर पैर! काश, मेरे पैर भी मेरे सींगों की तरह सुंदर होते।"
जीवन की परीक्षा और भागदौड़
तभी अचानक जंगल में एक भयानक दहाड़ गूँजी। एक भूखा बाघ बारहसिंगे की ओर झपटा। जान बचाने के लिए बारहसिंगा तेज़ी से भागा। जिन पैरों को वह 'भद्दा' कह रहा था, उन्हीं दुबले पैरों ने उसे बिजली जैसी गति दी। वह कुछ ही पलों में बाघ की पहुँच से बहुत दूर निकल गया।
बाघ पीछे छूट चुका था और बारहसिंगा एक घने जंगल में पहुँच गया। उसने राहत की साँस ली और सुरक्षित स्थान की तलाश में आगे बढ़ने लगा।
सुंदरता बनी काल
घनी झाड़ियों के बीच से गुज़रते समय, अचानक बारहसिंगे के वे सुंदर सींग एक पेड़ की झुकी हुई डालियों में बुरी तरह उलझ गए। उसने बहुत सिर पटका, बहुत कोशिश की, लेकिन उसके सुंदर सींगों ने उसे जकड़ लिया था।
दूर से बाघ को अपनी ओर आता देख वह रो पड़ा और बोला—
"मैं कितना मूर्ख था! जिन पैरों ने मेरी जान बचाई, मैं उन्हें कोस रहा था और जिन सींगों पर मुझे गर्व था, आज वही मेरी मौत का कारण बन रहे हैं।"
बाघ ने असहाय बारहसिंगे को वहीं दबोच लिया और उसका अंत कर दिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"सुंदरता से उपयोगिता अधिक महत्त्वपूर्ण होती है। जो वस्तु देखने में आकर्षक हो, वह हमेशा लाभकारी नहीं होती और जो साधारण दिखे, वही अक्सर सबसे अधिक कीमती होती है।"

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