"कौए और कबूतर - क्या एक निर्दोष कबूतर अपनी जान बचा पाया? जानिए क्यों गलत लोगों के साथ रहना आपके विनाश का कारण बन सकता है।"
कौए और कबूतर: गलत संगति का भारी परिणाम
क्या आप जानते हैं कि कभी-कभी आपकी अच्छाई भी आपको नहीं बचा पाती, यदि आप गलत लोगों के बीच खड़े हों? यह कहानी एक ऐसे मासूम कबूतर की है जिसे कौओं की संगति के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी।
किसान का जाल और कौओं की चोरी
एक किसान अपनी लहलहाती फसल को लेकर बहुत खुश था, लेकिन कौओं का एक झुंड रोज़ उसकी मेहनत पर पानी फेर देता था। वे अनाज खा जाते और फसल बर्बाद कर देते। तंग आकर किसान ने एक योजना बनाई। उसने खेत के एक हिस्से में बड़ा जाल बिछाया और उस पर लालच के लिए दाने बिखेर दिए।
जैसे ही कौओं का झुंड दानों को देखने नीचे उतरा, वे सभी जाल में फँस गए। किसान दूर से यह देख रहा था और उसे अपनी सफलता पर बहुत ख़ुशी हुई।
भीड़ में एक निर्दोष चेहरा
जब किसान जाल के पास पहुँचा, तो उसने देखा कि चीखते-चिल्लाते कौओं के बीच एक शांत और सुंदर कबूतर भी फँसा हुआ है। कबूतर ने गलती से उन कौओं का साथ पकड़ लिया था। कबूतर को देखकर किसान को आश्चर्य हुआ, पर दया नहीं आई।
किसान ने कठोर स्वर में कहा— "बेचारे कबूतर! भले ही तूने मेरी फसल को नुकसान न पहुँचाया हो, लेकिन आज तू इन चोरों की टोली में शामिल है। कानून और कुदरत दोनों यही कहते हैं कि जैसी संगति, वैसी गति।"
बुरी संगति का अंत
कबूतर अपनी सफाई देना चाहता था, लेकिन किसान ने उसकी एक न सुनी। किसान ने अपने शिकारी कुत्तों को इशारा किया और पल भर में कौओं के साथ-साथ उस निर्दोष कबूतर का भी अंत हो गया। कबूतर को केवल इसलिए सजा मिली क्योंकि वह गलत समय पर गलत लोगों के साथ था।
कहानी की सीख (The Moral)
"बुरे लोगों की संगति दुखदायी होती है।"
भावार्थ: आप कितने भी अच्छे क्यों न हों, अगर आपकी संगति बुरे लोगों के साथ है, तो दुनिया आपको उन्हीं की नज़र से देखेगी और आपको उनके कर्मों का फल भी भुगतना पड़ेगा।

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