The Dog in the Manger: A Lesson on Greed

 "कुत्ते की आदत छूटी - क्या कुत्ता गायों का चारा खा सकता था? जानिए कैसे एक बैल ने अपनी शक्ति से कुत्ते का घमंड तोड़ा और गायों को उनका अधिकार दिलाया।"

कुत्ते की आदत छूटी: हठ और समझदारी की कहानी

क्या कभी आपने किसी को ऐसी चीज़ पर कब्जा करते देखा है जो उसके किसी काम की नहीं? यह कहानी एक ऐसे कुत्ते की है जिसने गायों को उनके भोजन से दूर रखने की कोशिश की, लेकिन अंत में उसे साहस के सामने हार माननी पड़ी।

गौशाला में बिन बुलाए मेहमान

एक बार दो गायें बहुत भूखी थीं और चारा खाने के लिए अपनी गौशाला की ओर गईं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि उनकी नाँद (जहाँ चारा रखा जाता है) में एक कुत्ता बड़े आराम से बैठा है। जैसे ही गायें चारे के करीब आईं, कुत्ता उन पर ज़ोर-ज़ोर से भौंकने लगा। कुत्ते को लगा कि उसके शोर मचाने से गायें डर जाएँगी और वह उस जगह का मालिक बना रहेगा।

शांति बनाम अहंकार

एक गाय ने बहुत ही नम्रता से कुत्ते को समझाया— "भाई, हमें बहुत भूख लगी है। यह घास हमारा भोजन है और आप तो इसे खाते भी नहीं हैं, कृपया हमें अपना चारा खाने दें।" लेकिन कुत्ते पर इस बात का कोई असर नहीं हुआ। उसने अपनी अकड़ दिखाई और पहले से भी तेज़ भौंकने लगा। बेचारी गायें शांत स्वभाव की थीं, इसलिए वे वहाँ से लौट आईं।

जब साहस ने दिखाया आईना

गाय हार नहीं मानी, वह सहायता के लिए एक शक्तिशाली बैल को बुला लाई। बैल ने स्थिति को देखा और कुत्ते को अंतिम चेतावनी दी— "भाई, न तो तुम खुद घास खाते हो और न दूसरों को खाने दे रहे हो। यह तुम्हारी जगह नहीं है, यहाँ से चले जाओ।"

जब कुत्ता फिर भी टस से मस नहीं हुआ, तो बैल ने अपना रौद्र रूप धारण किया। उसने ज़ोर से डकार मारी और अपने पैने सींग तानकर कुत्ते की ओर लपका। बैल के क्रोध और उसकी शक्ति को देखकर कुत्ते की सारी हेकड़ी निकल गई। वह अपनी जान बचाकर दुम दबाकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ।


कहानी की सीख (The Moral)

"दूसरे की चीज़ पर अधिकार जताना अच्छा नहीं।"

भावार्थ: हमें उन चीज़ों में दखल नहीं देना चाहिए या उन पर कब्ज़ा नहीं करना चाहिए जो हमारे उपयोग की नहीं हैं। बेवजह का हठ केवल संघर्ष और हार का कारण बनता है।

🌟 कहानी का अंत
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