घोड़े को सबक: सहयोग का महत्व
क्या आप जानते हैं कि दूसरों की मदद न करना कभी-कभी हमारे लिए ही मुसीबत बन जाता है? यह कहानी एक घमंडी घोड़े और एक मेहनती गधे की है, जो हमें 'टीम वर्क' और 'दया' की असली कीमत समझाती है।
अनदेखी और अहंकार
एक व्यापारी अपने घोड़े और गधे के साथ बाज़ार की ओर जा रहा था। उसने गधे की पीठ पर सामान की भारी बोरियाँ लाद रखी थीं, जबकि घोड़ा बिल्कुल खाली पीठ शान से चल रहा था।
रास्ते में भारी बोझ से थककर गधे ने घोड़े से विनती की— "भाई, बोझ मेरी क्षमता से अधिक है और मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही। क्या तुम थोड़ा सा भार अपनी पीठ पर ले लोगे? इससे मेरी जान बच जाएगी।"
घोड़े ने बड़ी बेरुखी से जवाब दिया— "यह मेरा काम नहीं है। बोझ उठाना तुम्हारा भाग्य है और खाली चलना मेरा अधिकार। मुझे इस बारे में दोबारा मत टोकना।"
लालच और भारी परिणाम
बेचारा गधा चुपचाप चलता रहा, लेकिन कुछ ही दूरी पर वह लड़खड़ाकर गिर पड़ा। अत्यधिक थकान और बोझ के कारण उसके प्राण निकल गए। अब व्यापारी के पास और कोई विकल्प नहीं था। उसने गधे की पीठ का सारा सामान उतारा और उसे घोड़े की पीठ पर लाद दिया। इतना ही नहीं, उसने मरे हुए गधे की खाल भी घोड़े के ऊपर ही रख दी।
पछतावा और सीख
अब घोड़ा भारी बोझ के नीचे दबा जा रहा था। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने मन ही मन कहा— "काश! मैंने समय रहते गधे की मदद कर दी होती। अगर मैंने उसका थोड़ा सा बोझ बाँट लिया होता, तो आज मुझे यह सारा भार अकेले नहीं ढोना पड़ता।"
कहानी की सीख (The Moral)
"दूसरों के दुःख-दर्द में हाथ बँटाने से हमारा दुःख-दर्द भी कम हो जाता है।"
भावार्थ: समाज में या कार्यस्थल पर जब हम अपने साथियों की मदद करते हैं, तो हम वास्तव में एक सुरक्षित और सुगम भविष्य की नींव रखते हैं। स्वार्थ हमें थोड़े समय के लिए आराम दे सकता है, लेकिन दीर्घकाल में यह भारी नुकसान का कारण बनता है।

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