किसान और जादुई बतख: रातों-रात अमीर बनने की घातक भूल
क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीज़ हमें रोज़ थोड़ा-थोड़ा लाभ दे रही है, उसे एक बार में पाने की कोशिश करना कितना महंगा पड़ सकता है? आइए जानते हैं इस प्रसिद्ध बोध कथा के माध्यम से।
सोने का अंडा और बदलती किस्मत
एक समय की बात है, एक गाँव में एक साधारण किसान रहता था। उसके पास एक अनोखी और जादुई बतख थी। वह कोई मामूली पक्षी नहीं थी—वह रोज़ाना सोने का एक शुद्ध अंडा देती थी। किसान हर सुबह उस अंडे को बाज़ार में बेच आता और उससे उसे काफी धन मिलता था।
देखते ही देखते किसान की गरीबी दूर हो गई। उसने अपनी मेहनत और बतख के सहयोग से एक आलीशान मकान बनवाया। अब वह अपने परिवार के साथ बड़े ही आनंद और ठाठ-बाट से रहने लगा।
एक विनाशकारी विचार: लालच का जन्म
काफी समय तक सब कुछ बहुत अच्छा चलता रहा, लेकिन धीरे-धीरे किसान के मन में लालच ने घर कर लिया। उसे लगा कि बतख के पेट के अंदर तो सोने के अंडों का पूरा खजाना छिपा होगा। उसने सोचा—
"मैं रोज़ एक-एक अंडे का इंतज़ार क्यों करूँ? अगर मैं एक ही बार में बतख के पेट से सारे अंडे निकाल लूँ, तो मैं रातों-रात दुनिया का सबसे अमीर आदमी बन जाऊँगा।"
लालच का खौफनाक अंजाम
अंधे लालच में डूबे किसान ने आव देखा न ताव, एक तेज़ धार वाला चाकू उठाया और उस बेचारी बतख का पेट चीर डाला। लेकिन जैसे ही उसने अंदर देखा, उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। बतख के पेट के अंदर कोई खजाना नहीं था। वह अंदर से बिल्कुल वैसी ही थी जैसे कोई साधारण बतख होती है।
अब बतख मर चुकी थी। किसान को अपनी इस भयानक गलती का अहसास हुआ, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। जो बतख उसे रोज़ एक सोने का अंडा देकर अमीर बनाए रख रही थी, उसे उसने खुद अपने हाथों से खत्म कर दिया था। किसान सिर पकड़कर रोने लगा, पर अब पछताने से क्या होना था?
कहानी की सीख (The Moral)
"लालच बुरी बला है! जो लोग सब कुछ एक साथ पाने की कोशिश करते हैं, वे अक्सर वह भी खो देते हैं जो उनके पास पहले से होता है। संतोष और धैर्य ही सच्ची समृद्धि का आधार हैं।"

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