चूहा और बैल: जब बुद्धि ने दी शक्ति को मात
क्या केवल ताकतवर होना ही जीत की गारंटी है? यह कहानी एक छोटे से चूहे और एक विशाल बैल की है, जो हमें बताती है कि अहंकार का सिर हमेशा नीचा होता है।
एक छोटी सी शरारत और बड़ा गुस्सा
दोपहर का समय था। एक विशालकाय बैल पेड़ की शीतल छाया में गहरी नींद सो रहा था। वह इतने मजे में था कि उसके खर्राटों की आवाज़ दूर-दूर तक गूँज रही थी। तभी एक नन्हा चूहा अपने बिल से निकला। बैल को बेफिक्र सोते देख चूहे को शरारत सूझी। वह धीरे से बैल की नाक के पास पहुँचा और उसे ज़ोर से काट लिया।
बैल दर्द के मारे बिलबिलाकर उठा। उसने भयानक डकार मारी और गुस्से में लाल-पीला हो गया। चूहा तो पहले ही खतरे को भांप चुका था, वह सरपट भागा और एक मज़बूत दीवार के छेद में जा छिपा।
शक्ति का अहंकार और दीवार की टक्कर
बैल अपने अपमान से तिलमिला रहा था। उसने दीवार के सामने खड़े होकर गर्जना की— "अरे तुच्छ प्राणी! तूने मुझ जैसे बलवान को काटने की हिम्मत कैसे की? आज मैं इस दीवार को तहस-नहस कर दूँगा और तुझे मज़ा चखाऊँगा।"
बैल ने पीछे हटकर पूरी ताकत लगाई और अपना सिर दीवार पर दे मारा। दीवार पत्थर की तरह मज़बूत थी, उसे तो कुछ नहीं हुआ, लेकिन बैल का सिर लहूलुहान हो गया और उसे चक्कर आने लगे।
चूहे की सीख और बैल का अहसास
दीवार के छेद से सुरक्षित झांकते हुए चूहे ने मुस्कुराकर कहा:
"अरे मूर्ख! बेकार में अपना सिर क्यों फोड़ रहे हो? तुम चाहे कितने भी बलवान क्यों न हो, पर हर बार तुम्हारी शक्ति काम नहीं आती। कभी-कभी छोटे जीव भी तुम्हें धूल चटा सकते हैं।"
बैल पहले तो और क्रोधित हुआ, लेकिन धीरे-धीरे उसका गुस्सा शांत हुआ। उसे अहसास हुआ कि चूहा सही कह रहा है। केवल शरीर बड़ा होने से कोई अजेय नहीं हो जाता। वह अपनी हार मानकर और चूहे की बुद्धिमानी का सबक लेकर चुपचाप वहाँ से चला गया।
कहानी की सीख (The Moral)
"बुद्धि, शारीरिक शक्ति से कहीं अधिक बड़ी होती है। ताकतवर होना अच्छी बात है, लेकिन बिना बुद्धि के ताकत केवल स्वयं का नुकसान करती है। साथ ही, कभी भी किसी को छोटा समझकर उसका अनादर नहीं करना चाहिए।"

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