पिपहरीवाला और गाँव के लोग: बेईमानी का भारी मोल
क्या कोई मधुर संगीत चूहों का काल और बच्चों की मस्ती बन सकता है? आइए जानते हैं एक ऐसे पिपहरीवाले की कहानी, जिसने गाँव वालों को जुबान से मुकरने का ऐसा सबक सिखाया जिसे वे कभी नहीं भूल पाए।
चूहों का आतंक और पिपहरीवाले का वादा
एक गाँव चूहों के आतंक से बुरी तरह परेशान था। हजारों चूहे अनाज खा जाते, कपड़े कुतर देते और हर कीमती चीज़ बर्बाद कर देते थे। तभी वहाँ एक रहस्यमयी पिपहरीवाला आया। उसने प्रस्ताव रखा— "मैं गाँव के सभी चूहों को खत्म कर दूँगा, लेकिन इसके बदले मुझे पाँच हजार रुपये चाहिए।"
नुकसान से तंग आ चुके गाँव वालों ने तुरंत हाँ कर दी।
संगीत का जादू और चूहों का अंत
पिपहरीवाले ने जैसे ही अपनी पिपहरी बजाना शुरू किया, गाँव के हर कोने—घरों, गोदामों और खेतों से चूहों की फौज बाहर निकल आई। वे संगीत की धुन पर ऐसे मंत्रमुग्ध हुए कि नाचते हुए पिपहरीवाले के पीछे चल दिए। पिपहरीवाला उन्हें नदी के पास ले गया और पानी में उतर गया। सारे चूहे भी जोश में नदी में कूद गए और डूबकर खत्म हो गए।
गाँव वालों की बेईमानी
गाँव चूहों से मुक्त हो गया, लेकिन जब पिपहरीवाला अपने पाँच हजार रुपये लेने पहुँचा, तो गाँव वालों की नीयत बदल गई। उन्होंने सोचा कि अब तो चूहे मर चुके हैं, तो पैसे क्यों दें? उन्होंने साफ मना कर दिया।
पिपहरीवाला शांत रहा, लेकिन उसकी आँखों में एक चमक थी। उसने कहा— "तुम लोग बेईमान हो। अब मुझे रोकने के लिए तुम्हें पाँच नहीं, बल्कि दस हजार रुपये देने पड़ेंगे।"
बच्चों का नाच और गाँव वालों का पछतावा
पिपहरीवाले ने पहले से भी अधिक मधुर और सम्मोहक धुन बजानी शुरू की। इस बार चूहों की जगह गाँव के सभी मासूम बच्चे घरों से बाहर निकल आए। वे बेसुध होकर नाचने लगे। पिपहरीवाला बजता रहा और बच्चे नाचते-नाचते थकने लगे, लेकिन संगीत का जादू उन्हें रुकने नहीं दे रहा था।
गाँव वालों को डर लग गया कि कहीं उनके बच्चे भी चूहों की तरह थककर अपनी जान न गँवा दें। उन्हें अपनी बेईमानी पर गहरा पछतावा हुआ।
सच्चा न्याय
अंत में, गाँव वालों ने हाथ जोड़कर विनती की और पिपहरीवाले को दस हजार रुपये सौंप दिए। पैसे मिलते ही पिपहरी बंद हुई और बच्चे सुरक्षित अपने घर लौट आए। गाँव वालों ने एक कीमती सबक सीखा कि वादे से मुकरने की कीमत बहुत भारी होती है।
कहानी की सीख (The Moral)
"वचन की पवित्रता सबसे ऊपर है। जो लोग ईमानदारी से मुकरते हैं, उन्हें समय आने पर उसका दोगुना हर्जाना भुगतना पड़ता है। बेईमानी की सजा हमेशा बहुत भारी होती है।"

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