मुर्गा और लोमड़ी: धूर्तता पर बुद्धिमानी की जीत
क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति का सामना किया है जो अपनी मीठी बातों से आपको धोखा देना चाहता हो? यह कहानी एक चतुर मुर्गे और एक चालाक लोमड़ी की है, जहाँ एक झूठ का अंत दूसरे 'सफेद झूठ' से होता है।
लोमड़ी की 'अहिंसा' वाली चाल
एक भूखी लोमड़ी ने पेड़ की ऊँची डाल पर बैठे एक मोटे-ताज़े मुर्गे को देखा। वह उसे खाना तो चाहती थी, पर पेड़ पर चढ़ना उसके बस में नहीं था। मुर्गे को नीचे उतारने के लिए उसने एक बड़ा ही अजीब झूठ बोला।
उसने बड़े प्यार से कहा, "मुर्गा भाई! क्या तुमने सुना नहीं? स्वर्ग से आदेश आया है कि अब जंगल में सब शांति से रहेंगे। शेर और बकरी, लोमड़ी और मुर्गे—सब अब पक्के दोस्त हैं। कोई किसी को नहीं मारेगा। डरो मत, नीचे आ जाओ, हम पुरानी बातें भूलकर नई दोस्ती की शुरुआत करेंगे!"
मुर्गे का 'मास्टरस्ट्रोक'
मुर्गा समझ गया कि लोमड़ी उसे बेवकूफ बना रही है। उसने शांति से गर्दन घुमाई और दूर देखने का नाटक किया। उसने कहा, "वाह! यह तो बहुत ही अच्छी खबर है। देखो, शायद इसी खुशी में तुम्हारे कुछ दोस्त भी यहाँ दौड़े चले आ रहे हैं!"
लोमड़ी ने चौंककर पूछा, "मेरे कौन से दोस्त?"
मुर्गे ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "वही शिकारी कुत्ते! वे बस कुछ ही पलों में यहाँ पहुँचने वाले हैं।"
चोर की दाढ़ी में तिनका
शिकारी कुत्तों का नाम सुनते ही लोमड़ी के पसीने छूट गए। वह जान बचाने के लिए भागने ही वाली थी कि मुर्गे ने उसे टोका— "अरे भाई! भाग क्यों रही हो? अब तो हम सब दोस्त हैं न? शिकारी कुत्ते तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे।"
लोमड़ी हाँफते हुए बोली, "दोस्त तो हम हैं... पर शायद कुत्तों ने अभी तक रेडियो पर यह समाचार नहीं सुना होगा!" और यह कहकर वह सरपट भाग खड़ी हुई। मुर्गा पेड़ पर बैठा-बैठा लोमड़ी की बेवकूफी पर हँसने लगा।
कहानी की सीख (The Moral)
"धूर्त व्यक्ति की बातों पर कभी आँख मूँदकर विश्वास नहीं करना चाहिए। संकट के समय अपनी बुद्धि का प्रयोग करने से बड़ी से बड़ी मुसीबत टल सकती है।"

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