"भेड़िया और बाँसुरी - क्या मेमने ने संगीत से अपनी जान बचाई? पढ़िए यह कहानी जो कठिन समय में धैर्य और बुद्धि के महत्व को समझाती है।"
भेड़िया और बाँसुरी: मौत के मुँह से बचने की चतुर युक्ति
क्या एक नन्हा मेमना खूँखार भेड़िये को मात दे सकता है? यह कहानी हमें सिखाती है कि जब ताकत काम न आए, तो बुद्धि का सही इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
मौत का सामना और मेमने की आखिरी इच्छा
एक बार एक भेड़िये ने भेड़ों के झुंड से एक नन्हा मेमना पकड़ लिया। वह उसे खाने के लिए सुरक्षित स्थान की तलाश में जंगल की ओर ले गया। मेमना जानता था कि वह भेड़िये से लड़कर नहीं जीत सकता, इसलिए उसने एक अनोखी चाल चली।
मेमने ने बड़ी विनम्रता से कहा— "चाचा, मुझे पता है कि मेरा अंत करीब है। पर मैंने सुना है कि आप बाँसुरी बजाने में माहिर हैं। क्या मरने से पहले आप मुझे एक मधुर धुन सुनाकर मेरी अंतिम इच्छा पूरी करेंगे?"
चापलूसी का जाल और भेड़िये की मूर्खता
अपनी प्रशंसा सुनकर भेड़िये का घमंड जाग उठा। उसने बाँसुरी निकाली और बजाना शुरू किया। धुन खत्म होने पर मेमने ने और भी ज़्यादा तारीफ की— "वाह चाचा! आप तो गड़रिये से भी कहीं बेहतर बजाते हैं। क्या आप एक बार और, थोड़ा ऊँचे सुर में बजा सकते हैं?"
तारीफों से फूला हुआ भेड़िया अपनी सुध-बुध खो बैठा। उसने मेमने को और ज़्यादा प्रभावित करने के लिए पूरी ताकत लगाकर और ऊँचे स्वर में बाँसुरी बजाना शुरू कर दिया।
सूझबूझ की जीत
बाँसुरी की वह ऊँची आवाज़ दूर खड़े गड़रिये और उसके शिकारी कुत्तों के कानों तक पहुँच गई। वे समझ गए कि जंगल में कुछ गड़बड़ है। शिकारी कुत्ते तुरंत आवाज़ की दिशा में दौड़े और भेड़िये को घेर लिया। अपनी जान बचाने के लिए भेड़िया वहाँ से भागा, लेकिन कुत्तों ने उसे दबोच लिया।
इस बीच, मेमना अपनी बुद्धि के बल पर सुरक्षित बच निकला और भागता हुआ अपने झुंड में वापस मिल गया।
कहानी की सीख (The Moral)
"धीरज और सूझबूझ से ही हम बड़े-से-बड़े संकट को पार कर सकते हैं।"
भावार्थ: विपत्ति के समय अपनी हिम्मत न हारें। शांत दिमाग से सोची गई एक छोटी सी योजना भी आपको नामुमकिन लगने वाली परिस्थिति से बाहर निकाल सकती है।
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