"पहाड़ और चूहा - क्या आकार ही सब कुछ है? जानिए कैसे एक छोटे से चूहे ने विशाल पर्वत का घमंड तोड़ा और अपनी उपयोगिता सिद्ध की।"
पहाड़ और चूहा: कद बड़ा या काबिलियत?
क्या बड़ा होना ही श्रेष्ठ होने की निशानी है? एक विशाल पर्वत और एक नन्हे चूहे के बीच हुए इस रोचक संवाद ने यह सिद्ध कर दिया कि कुदरत की हर रचना अपने आप में बेजोड़ है।
पहाड़ का अहंकार
एक विशाल पहाड़ अपनी ऊँचाई और मजबूती के घमंड में चूर था। उसने अपने पास से गुज़र रहे एक छोटे से चूहे को देखा और उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा— "तुम कितने तुच्छ और असहाय जीव हो! मेरा कद देखो, मैं बादलों का रास्ता रोक देता हूँ और पूरी दुनिया को ऊपर से देखता हूँ। तुम्हारी क्या औकात है?"
चूहे का तार्किक जवाब
चूहा शांत रहा और उसने मुस्कुराकर पहाड़ की आँखों में देखा। चूहा बोला— "महामहिम, मैं मानता हूँ कि मैं आपके जितना विशाल नहीं हूँ। लेकिन याद रखिए, आप भी मेरे जितने छोटे और फुर्तीले नहीं हैं! हर चीज़ का अपना महत्व होता है।"
पहाड़ हँसा और बोला— "छोटे होने का भला क्या फायदा?"
जब विशालता हार गई
चूहे ने निडर होकर जवाब दिया— "आप बादलों को रोक सकते हैं, लेकिन आप अपनी जगह से हिल नहीं सकते। मैं भले ही छोटा हूँ, लेकिन मैं अपनी मर्ज़ी से कहीं भी जा सकता हूँ। और सबसे बड़ी बात—मैं अपने नन्हे दाँतों से आपकी विशाल छाती और जड़ों में गहरे बिल खोद सकता हूँ, पर आप मुझे रोक नहीं सकते। क्या आप में इतनी शक्ति है कि आप अपनी देह पर रेंगते एक छोटे से चूहे को रोक सकें?"
पहाड़ के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था। एक नन्हे से जीव ने अपनी चतुराई और तर्क से विशाल पर्वत का अहंकार चूर-चूर कर दिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"छोटा हो या बड़ा, अपनी-अपनी जगह सब महत्वपूर्ण होते हैं।"
भावार्थ: किसी के बाहरी आकार या स्थिति को देखकर उसे कमतर नहीं आंकना चाहिए। हर व्यक्ति और वस्तु की अपनी एक विशिष्ट शक्ति (Unique Strength) होती है जो दूसरों के पास नहीं होती।
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