बादाम किसे मिला: आपसी झगड़ा और तीसरे का लाभ
क्या आपने कभी सोचा है कि जब दो लोग एक छोटी सी चीज़ के लिए आपस में लड़ते हैं, तो उसका असली फायदा किसे होता है? यह कहानी दो लड़कों और एक चालाक राहगीर की है, जो हमें जीवन का एक कड़वा सच सिखाती है।
एक बादाम और दो दावेदार
एक दोपहर दो दोस्त सड़क के किनारे टहल रहे थे। अचानक उनकी नज़र ज़मीन पर गिरे एक साबुत बादाम पर पड़ी। दोनों ही उस पर झपट पड़े। एक लड़के ने तेज़ी से बादाम उठा लिया, जबकि दूसरा लड़का चिल्लाया—
"यह बादाम मेरा है, क्योंकि सबसे पहले मैंने इसे देखा था!"
लेकिन बादाम पकड़े हुए लड़के ने जवाब दिया— "बिल्कुल नहीं! इसे मैंने अपने हाथों से उठाया है, इसलिए इस पर मेरा अधिकार है।" दोनों के बीच बहस बढ़ने लगी और बात हाथापाई तक पहुँच गई।
चालाक मध्यस्थ का प्रवेश
तभी वहाँ से एक लंबा और चतुर लड़का गुज़रा। लड़कों को लड़ते देख वह उनके पास आया और बड़े विश्वास के साथ बोला— "तुम लोग क्यों लड़ रहे हो? लाओ, यह बादाम मुझे दो। मैं तुम दोनों का उचित फैसला कर देता हूँ।"
दोनों लड़के उसकी बातों में आ गए और बादाम उसे सौंप दिया। उस लंबे लड़के ने तुरंत बादाम को पत्थर से फोड़ा। उसने बादाम के छिलके के दो बराबर टुकड़े किए।
फैसला और असली चालाकी
लंबे लड़के ने न्याय करने के अंदाज़ में कहा— "देखो, बादाम देखने वाले को मिलता है ऊपर का आधा छिलका, और बादाम उठाने वाले को मिलता है नीचे का आधा छिलका।" उसने दोनों लड़कों के हाथों में एक-एक सूखा छिलका थमा दिया।
फिर, बादाम की स्वादिष्ट गिरी अपने मुँह में डालते हुए वह मुस्कुराकर बोला—
"और यह गिरी (बादाम का फल) मेरे पारिश्रमिक के तौर पर है, क्योंकि मैंने तुम दोनों का झगड़ा सुलझाने में मेहनत की है!"
दोनों लड़के हाथ में छिलके लिए हक्के-बक्के खड़े रह गए। उन्हें समझ आ गया कि आपसी ज़िद की वजह से उन्होंने असली चीज़ ही खो दी।
कहानी की सीख (The Moral)
"दो के झगड़े में तीसरे का फायदा।"
भावार्थ: जब हम आपस में मिल-बैठकर समस्याओं का समाधान नहीं करते और जिद पर अड़े रहते हैं, तो कोई तीसरा व्यक्ति उस स्थिति का लाभ उठाकर हमें खाली हाथ छोड़ देता है।

0 Comments