सुंदरी और अभिशप्त राजकुमार
बहुत समय पहले, एक समृद्ध राज्य में एक व्यापारी अपनी तीन बेटियों के साथ रहता था। उसकी सबसे छोटी बेटी, जिसका नाम ब्यूटी (सुंदरी) था, न केवल दिखने में अप्सरा जैसी थी, बल्कि उसका स्वभाव भी बहुत कोमल और विचारशील था। जबकि उसकी बड़ी बहनें घमंडी थीं और उन्हें केवल धन-दौलत से प्यार था, ब्यूटी अक्सर किताबों और सुंदर सपनों की दुनिया में खोई रहती थी।
किस्मत का खेल
एक रात आए भयंकर समुद्री तूफान ने व्यापारी के सारे जहाज डुबो दिए। रातों-रात वह परिवार गरीबी की कगार पर आ गया। लेकिन ब्यूटी ने हिम्मत नहीं हारी; उसने महल जैसे घर को छोड़कर एक छोटी सी झोपड़ी में रहना और हाथ से काम करना खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।
एक दिन खबर मिली कि व्यापारी का एक जहाज वापस आ गया है। जाते समय उसने बेटियों से पूछा कि वे क्या उपहार चाहती हैं। बड़ी बहनों ने महंगे गहनों और रेशमी कपड़ों की मांग की, पर ब्यूटी ने सरलता से कहा, "पिताजी, मेरे लिए बस एक 'बैंगनी गुलाब' ले आइएगा।"
रहस्यमयी महल और दरिंदे का क्रोध
व्यापारी का वह जहाज भी खाली निकला। दुखी मन से लौटते समय वह घने जंगल में रास्ता भटक गया और एक जादुई महल में जा पहुँचा। वहाँ उसे खाना और पनाह तो मिली, पर जाते समय जब उसने ब्यूटी के लिए एक गुलाब तोड़ा, तो एक भयानक दरिंदा (बीस्ट) उसके सामने आ खड़ा हुआ।
उस दरिंदे ने गरजते हुए कहा, "मैंने तुम्हें खाना दिया, छत दी और तुमने बदले में मेरा सबसे कीमती गुलाब चुराया? इसकी कीमत तुम्हारी जान होगी!" व्यापारी के गिड़गिड़ाने पर दरिंदे ने एक शर्त रखी— "यदि तुम्हारी कोई एक बेटी अपनी मर्जी से यहाँ रहने आए, तो तुम बच सकते हो।"
ब्यूटी का त्याग
जब ब्यूटी को यह पता चला, तो उसने बिना सोचे अपने पिता के प्राण बचाने का निर्णय लिया। वह उस भयानक महल में रहने चली गई। शुरू में वह दरिंदे के डरावने रूप से डरती थी, पर धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि वह बीस्ट बाहर से जितना कठोर है, अंदर से उतना ही दयालु और अकेला है।
दरिंदा हर शाम ब्यूटी से पूछता, "ब्यूटी, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?" और ब्यूटी हर बार विनम्रता से इनकार कर देती। फिर भी, दरिंदे ने उसे कभी मजबूर नहीं किया। उसने ब्यूटी को एक जादुई आईना दिया जिससे वह अपने पिता को देख सकती थी।
वादे की परीक्षा
एक दिन आईने में ब्यूटी ने देखा कि उसके पिता बीमार हैं। उसने दरिंदे से घर जाने की अनुमति मांगी। दरिंदे ने भारी मन से कहा, "तुम जा सकती हो, पर अगर तुम एक हफ्ते में वापस नहीं आईं, तो मैं दुख से मर जाऊँगा।"
घर जाकर ब्यूटी अपने परिवार की सेवा में इतनी व्यस्त हो गई कि उसे दिन बीतने का पता ही नहीं चला। तभी एक रात उसने सपना देखा कि दरिंदा मर रहा है। उसकी आत्मा कांप उठी। उसे अहसास हुआ कि वह भी उस दयालु दरिंदे से प्रेम करने लगी है।
श्राप का अंत
जैसे ही ब्यूटी महल वापस पहुँची, उसने दरिंदे को बेसुध पाया। उसने रोते हुए उसे गले लगाया और कहा, "उठिए! मैं आपसे प्यार करती हूँ, मैं आपसे शादी करूँगी!"
ब्यूटी के इन शब्दों में इतना जादू था कि वह भयानक दरिंदा एक पल में एक सुंदर राजकुमार में बदल गया। राजकुमार ने बताया, "एक चुड़ैल ने मुझे श्राप दिया था कि जब तक कोई लड़की मेरी बदसूरती के बावजूद मुझसे सच्चा प्रेम नहीं करेगी, मैं इसी रूप में रहूँगा।"
ब्यूटी और राजकुमार का विवाह हुआ। उस दिन पूरे राज्य ने देखा कि असली सुंदरता एक दयालु हृदय और सुंदर आत्मा में बसती है। वे दोनों हमेशा के लिए खुश रहने लगे।

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