राजकुमारी आभा और स्वर्ण पंछी
बहुत समय पहले एक समृद्ध राज्य में एक राजकुमारी रहती थी, जिसका नाम था आभा। वह अपनी अनोखी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध थी, विशेषकर अपने लंबे, लाल सुनहरे बालों के कारण। उसे गुलाबों से इतना गहरा लगाव था कि लोग उसे प्यार से 'गुलाब-कुमारी' कहने लगे थे।
राज्य का बच्चा-बच्चा आभा को प्रेम करता था। हर शाम, जब सूरज ढलने लगता, आभा अपनी बालकनी पर आती और धीरे से ताली बजाती। तभी कहीं से उड़ता हुआ एक स्वर्ण पक्षी आता और उसके कंधे पर बैठ जाता। जैसे ही वह पक्षी आता, आभा के लाल बाल जादुई रोशनी से जगमगाने लगते। पक्षी एक मधुर लोरी गुनगुनाता और आभा उसके साथ सुर मिलाती। उस संगीत के जादू से पूरा राज्य चैन की नींद सो जाता और सभी को भोर होने तक सुखद सपने आते।
दुष्ट जादूगरनी का श्राप
इस सुखद जीवन में तब ग्रहण लगा जब एक ईर्ष्यालु जादूगरनी की नजर आभा पर पड़ी। उसे आभा की आवाज और उसकी शांति से नफरत थी। उसने एक भयानक मंत्र पढ़ा— "आबरा का डाबरा, आभा का सौंदर्य धुंधला पड़ जाए!"
तुरंत ही आभा के सुनहरे लाल बाल कोयले जैसे काले हो गए। उस रात जब आभा ने लोरी गाई, तो लोगों को सुंदर सपनों के बजाय डरावने सपने आए। कोई पानी में डूबने का सपना देख रहा था, तो कोई घने अंधेरे का। पूरा राज्य सहम गया।
समाधान और नया संघर्ष
उदास आभा ने स्वर्ण पक्षी से मदद मांगी। पक्षी चहचहाया, "काले बाल, गुलाब जल में..."
आभा ने एक टब में पानी भरा और उसमें गुलाब की पंखुड़ियां डालकर अपने बाल धोए। जादू काम कर गया और उसके बाल फिर से लाल हो गए। लेकिन जब जादूगरनी को यह पता चला, तो वह क्रोध से भर गई। उसने न केवल आभा को दोबारा श्राप दिया, बल्कि अपनी शक्ति से राज्य के सारे गुलाब के पौधे नष्ट कर दिए।
अब न तो राज्य में गुलाब बचे थे और न ही श्राप तोड़ने का कोई रास्ता। आभा बालकनी पर बैठकर सिसकने लगी।
राजकुमार आरव और बचपन का वादा
तभी बालकनी के नीचे एक सुंदर राजकुमार खड़ा था, जिसका नाम था आरव। आरव और आभा बचपन के मित्र थे। जब वे छोटे थे, तब वफादारी के प्रतीक के रूप में उन्होंने एक-दूसरे के सिर का एक-एक बाल अपने पास रखा था।
जैसे ही आभा की आंखों से एक आंसू टपका, आरव ने अपना वह छोटा सा डिब्बा निकाला जिसमें आभा का वह पुराना लाल बाल सुरक्षित था। उसने वह बाल आभा के आंसू पर रख दिया। देखते ही देखते, वह बाल एक ताजे लाल गुलाब में बदल गया!
आभा ने खुशी-खुशी उस गुलाब की पंखुड़ियों से फिर से जादुई पानी तैयार किया और अपने बाल धोए। श्राप हमेशा के लिए टूट गया।
बुराई का अंत
जब जादूगरनी ने देखा कि उसका श्राप फिर से बेकार हो गया है, तो वह गुस्से से इतनी फूल गई कि धमाके के साथ छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर गई। उसका वजूद हमेशा के लिए खत्म हो गया।
राजकुमार आरव और राजकुमारी आभा का उसी दिन विवाह हुआ। राज्य के बगीचों में फिर से गुलाब खिल उठे। अब हर शाम आभा और वह स्वर्ण पक्षी मिलकर लोरी गाते हैं, और पूरे राज्य के लोग शांति से मीठे सपने देखते हुए सोते हैं।

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