सलोनी और जादुई जूती
बहुत पुरानी बात है, एक संपन्न व्यापारी रहता था जिसकी एक ही संतान थी— सलोनी। सलोनी की माँ बहुत बीमार पड़ गई और अंतिम समय में उसने सलोनी से कहा, "बेटा, हमेशा दयालु और नेक बने रहना, ईश्वर तुम्हारी रक्षा करेंगे।" माँ के जाने के बाद सलोनी अक्सर उनकी याद में समय बिताती।
सलोनी के पिता व्यापार के कारण अक्सर बाहर रहते थे। सलोनी की देखभाल के लिए उन्होंने एक विधवा महिला से विवाह कर लिया, जिसकी दो बेटियां थीं— माया और छाया।
सौतेला व्यवहार और संघर्ष
पिता के जाते ही सौतेली माँ का असली चेहरा सामने आ गया। सलोनी, जो उस घर की लाडली थी, अब एक नौकरानी बनकर रह गई। माया और छाया सोफे पर बैठकर फल खातीं और सलोनी सारा दिन झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करती। उसे ढंग से खाना भी नहीं दिया जाता था और घर की छत के एक कोने में उसे सोना पड़ता था।
सलोनी की हालत देखकर घर के छोटे चूहे और चिड़ियां उसके दोस्त बन गए थे, जिनसे वह अपने दिल की बात कहती थी।
महल का निमंत्रण
एक दिन राजा ने घोषणा की कि राजकुमार के विवाह के लिए महल में एक भव्य नृत्य समारोह (Ball) आयोजित किया जाएगा। पूरे शहर की युवतियों को बुलाया गया।
सलोनी भी महल देखना चाहती थी, पर उसकी सौतेली माँ ने उसे झिड़क दिया, "अपनी शक्ल देखी है? इन फटे कपड़ों में तुम महल जाओगी? सब हम पर हसेंगे।" माँ और दोनों बहनें सज-धजकर चली गईं और सलोनी अकेली रोती रह गई।
परी माँ का जादू
तभी अचानक वहाँ एक 'परी माँ' प्रकट हुईं। सलोनी को रोता देख उन्होंने जादू की छड़ी घुमाई।
- सलोनी के फटे कपड़े एक बेहद खूबसूरत सुनहरे गाउन में बदल गए।
- उसके पैरों में कांच की चमकती जूतियां आ गईं।
- एक कद्दू को सुंदर रथ बनाया गया और चूहों को घोड़े।
परी माँ ने चेतावनी दी, "याद रखना बेटी, यह जादू सिर्फ आधी रात तक रहेगा। 12 बजते ही सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।"
राजकुमार और वह रात
जब सलोनी ने महल के हॉल में कदम रखा, तो उसकी सुंदरता देख सब दंग रह गए। यहाँ तक कि उसकी माँ और बहनें भी उसे पहचान नहीं पाईं। राजकुमार की नजरें उस पर टिकी रह गईं। उन्होंने पूरी रात सलोनी के साथ नृत्य किया।
समय का पता ही नहीं चला और जैसे ही घड़ी में 12 बजने वाले थे, सलोनी घबराकर भागी। भागते समय उसकी एक कांच की जूती सीढ़ियों पर ही छूट गई। राजकुमार ने उसे उठा लिया और ठान लिया कि वह इसी जूती की मालकिन से विवाह करेंगे।
तलाश और मिलन
राजकुमार जूती लेकर हर घर गए। जब वे सलोनी के घर पहुँचे, तो माया और छाया ने जूती पहनने की बहुत कोशिश की, पर उनके पैर उसमें फिट नहीं आए। सौतेली माँ ने सलोनी को ऊपर एक कमरे में बंद कर दिया था।
लेकिन राजकुमार के आदमियों ने सलोनी को देख लिया। जैसे ही सलोनी ने जूती पहनी, वह उसके पैर में बिल्कुल सटीक बैठ गई। सौतेली माँ के होश उड़ गए!
राजकुमार ने सलोनी को पहचान लिया और उसे विवाह का प्रस्ताव दिया। सलोनी के पिता को वापस बुलाया गया और धूमधाम से सलोनी और राजकुमार का विवाह हुआ। सलोनी ने अपनी दयालुता से सबको जीत लिया और वे हमेशा खुशी-खुशी रहने लगे।

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