राजकुमारी रत्नावली और वीर
एक समय की बात है, एक बूढ़ा किसान अपने तीन बेटों के साथ रहता था। तीनों बेटे— आर्यन, वरुण और वीर—बहुत ही होनहार और आज्ञाकारी थे। एक दिन पिता ने उनसे कहा, "मेरे बच्चों, अब समय आ गया है कि तुम अपना घर बसाओ और अपने लिए जीवनसाथी की तलाश करो।"
जब बेटों ने पूछा कि वे सही दिशा कैसे चुनें, तो पिता ने एक पुरानी परंपरा बताई: "खेत में जाकर एक पेड़ काटो, वह जिस दिशा में गिरेगा, उसी दिशा में तुम्हें अपना भाग्य मिलेगा। लेकिन याद रखना, पेड़ काटने से पहले एक नया पौधा जरूर लगाना।"
तीन दिशाएं, तीन भाग्य
बेटों ने पिता का वचन माना और पौधे लगाने के बाद पेड़ काटे:
आर्यन (सबसे बड़ा): उसका पेड़ उत्तर की ओर गिरा। वह शहर गया और अपनी पसंद की लड़की से मिला।
वरुण (मंझला): उसका पेड़ दक्षिण की ओर गिरा। उसे भी वहां अपनी मनपसंद साथी मिल गई।
वीर (सबसे छोटा): उसका पेड़ घने जंगल की ओर गिरा। उसके भाई उस पर हंसने लगे, "वीर, क्या तुम किसी हिरनी या लोमड़ी से शादी करोगे?" पर वीर ने हार नहीं मानी और जंगल की ओर चल दिया।
जंगल की नन्ही चूहिया
वीर जंगल में बहुत भटका, पर उसे कोई इंसान नहीं मिला। थककर वह एक पुरानी झोपड़ी में गया। वहां उसे एक नन्ही चूहिया मिली। वीर को उदास देखकर चूहिया बोली, "वीर, तुम परेशान क्यों हो? तुम मुझे ही अपनी जीवनसंगिनी मान लो।"
वीर पहले तो चौंक गया, पर जब चूहिया ने नाचकर और गाकर उसका मन बहलाया, तो वीर को उसका स्वभाव बहुत पसंद आया। वीर ने उसे अपना जीवनसाथी स्वीकार कर लिया।
पिता की परीक्षाएं
जब तीनों भाई घर लौटे, तो पिता ने बहुओं की परीक्षा लेने के लिए दो काम दिए:
स्वादिष्ट पाव (Bread) बनाना: आर्यन और वरुण की होने वाली पत्नियों ने साधारण रोटियां बनाईं, पर चूहिया ने अपनी जादुई चांदी की घंटी बजाकर चूहों की सेना बुलाई और वीर के लिए सबसे सफेद और शाही पाव तैयार करवाया।
कपड़ा बुनना: बाकी दोनों ने सूती कपड़े दिए, पर वीर की चूहिया ने सबसे बेहतरीन रेशम का मखमली कपड़ा बुनकर भेजा। पिता यह देखकर दंग रह गए और समझ गए कि वीर की पसंद कोई साधारण नहीं है।
श्राप से मुक्ति
अगले दिन पिता ने तीनों बहुओं को घर लाने को कहा। चूहिया एक नन्हे रथ पर सवार होकर वीर के साथ चली। रास्ते में नदी के पुल पर एक अभिमानी आदमी ने मज़ाक में उस नन्हे रथ को लात मारकर नदी में गिरा दिया। वीर रोने लगा, "मेरी नन्ही जान डूब गई!"
तभी एक चमत्कार हुआ! नदी से चूहिया के बजाय एक अत्यंत सुंदर राजकुमारी बाहर निकली। उसका नाम था राजकुमारी रत्नावली।
उसने वीर को बताया, "वीर, मुझे एक दुष्ट जादूगर ने चूहिया बनने का श्राप दिया था। यह श्राप तभी टूट सकता था जब कोई इंसान मुझे चूहिया के रूप में भी पूरे दिल से अपना ले। तुमने वह कर दिखाया, और नदी में गिरने से वह श्राप पूरी तरह खत्म हो गया।"
सुखी जीवन
जब वीर राजकुमारी रत्नावली के साथ घर पहुँचा, तो उसके पिता और भाई देखते रह गए। पिता ने दोनों को आशीर्वाद दिया और धूमधाम से उनकी शादी कराई। वीर और रत्नावली अपने महल में चले गए और हमेशा सुख-शांति से रहने लगे।

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