चार भाई और अनोखा हुनर
एक छोटे से गांव में दीनदयाल नाम का एक गरीब मछुआरा रहता था। उसके चार बेटे थे— आर्यन, ईशान, कबीर और रुद्र। दीनदयाल के पास बेटों को देने के लिए धन तो नहीं था, पर उसने उन्हें दुनिया देखने और अपनी किस्मत आजमाने की सीख दी।
पिता की आज्ञा मानकर चारों भाई घर से निकल पड़े। एक चौराहे पर पहुँचकर उन्होंने तय किया कि वे चार साल तक अलग-अलग दिशाओं में जाकर कोई न कोई हुनर सीखेंगे और फिर इसी जगह मिलेंगे।
चार भाई, चार हुनर
- आर्यन (सबसे बड़ा): उसे रास्ते में एक चतुर व्यक्ति मिला जिसने उसे 'चीजों को गायब करने' (हाथ की सफाई) की कला सिखाई। वह इतना माहिर हो गया कि किसी की आँखों के सामने से भी चीज़ चुरा ले और पता न चले।
- ईशान (दूसरा भाई): उसे एक विद्वान मिला जिसके पास एक अद्भुत दूरबीन थी। ईशान ने उस दूरबीन से धरती और आसमान की हर गुप्त चीज़ को देखने की कला सीखी।
- कबीर (तीसरा भाई): वह एक अनुभवी शिकारी के पास रहा। उसने धनुष-बाण चलाने में ऐसी निपुणता हासिल की कि उड़ती चिड़िया की आँख पर भी उसका निशाना कभी नहीं चूकता था।
- रुद्र (सबसे छोटा): वह एक कुशल दर्जी के पास गया। रुद्र ने सिलाई की ऐसी बारीक कला सीखी कि वह टूटे हुए अंडे के छिलके को भी ऐसे सी देता था कि जोड़ का पता न चले।
चार साल बाद, जब वे वापस लौटे, तो पिता ने उनकी परीक्षा ली। आर्यन ने चिड़िया के नीचे से अंडे गायब कर दिए, कबीर ने एक तीर से उन अंडों के दो टुकड़े किए और रुद्र ने उन्हें वापस ऐसे सी दिया कि उनमें से सुरक्षित चूजे बाहर आए।
राजकुमारी की रक्षा और ड्रैगन का सामना
उन्हीं दिनों राज्य में खबर फैली कि एक खूंखार ड्रैगन ने राजकुमारी का अपहरण कर लिया है। राजा ने घोषणा की कि जो भी राजकुमारी को बचाएगा, उसे इनाम दिया जाएगा। चारों भाई निकल पड़े।
- ईशान ने अपनी दूरबीन से देखा कि राजकुमारी समुद्र के बीच एक टापू पर ड्रैगन की गोद में सिर रखकर सोई है।
- आर्यन ने अपनी कला दिखाई और ड्रैगन की नींद खराब किए बिना बड़ी चतुराई से राजकुमारी को वहां से उठा लिया।
- जब वे नाव से भाग रहे थे, ड्रैगन जाग गया और उन पर हमला करने बढ़ा। तभी कबीर ने एक अचूक निशाना साधा और ड्रैगन को मार गिराया।
- ड्रैगन के पानी में गिरने से इतना बड़ा तूफान आया कि उनकी नाव टूट गई। तब रुद्र ने अपनी जादुई सुई और धागे से नाव के टुकड़ों को इतनी तेजी से सिया कि वे सब सुरक्षित किनारे लग गए।
राजा का न्याय
जब वे राजकुमारी के साथ दरबार पहुँचे, तो चारों भाइयों के बीच बहस छिड़ गई कि असली हकदार कौन है। ईशान ने कहा उसने ढूंढा, आर्यन ने कहा उसने बचाया, कबीर ने कहा उसने सुरक्षा की और रुद्र ने कहा उसने सबकी जान बचाई।
राजा ने उनकी बुद्धिमानी और एकता को देख कर एक बड़ा फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, "तुम चारों की मेहनत के बिना यह कार्य पूरा नहीं होता। इसलिए राजकुमारी का विवाह किसी से नहीं होगा, बल्कि मैं तुम चारों को आधा राज्य इनाम में देता हूँ।"
चारों भाई खुश हो गए। उन्होंने अपने पिता दीनदयाल को महल में बुलाया। अब उनकी गरीबी मिट चुकी थी और वे सब मिल-जुलकर सुख से रहने लगे।

0 Comments