माँ हले और दो बहनें: स्टेला और बेला
पढ़िए माँ हले (Mother Holle) की जादुई कहानी। जानें कैसे मेहनती स्टेला पर सोने की वर्षा हुई और आलसी बेला को उसके कर्मों का फल मिला।
माँ हले और दो बहनें: स्टेला और बेला
जादुई दुनिया का सफर
एक दिन कुएं पर सूत कातते समय स्टेला की तकली (spindle) कुएं में गिर गई। माँ के डर से वह उसे निकालने के लिए कुएं में कूद गई। जब उसकी आँख खुली, तो वह एक जादुई घास के मैदान में थी।
परोपकार: रास्ते में स्टेला ने जलती भट्टी से रोटियों को बाहर निकाला और सेब के भारी वृक्ष से फल गिराकर उसकी मदद की।
मदर हले की सेवा: वह 'माँ हले' (Mother Holle) के घर पहुँची। माँ हले ने उसे काम पर रखा और कहा कि वह रोज उनके बिस्तर को खूब झाड़े ताकि उसके पंख उड़ें (जिससे धरती पर बर्फ गिरती है)। स्टेला ने पूरी निष्ठा से सेवा की।
सोने का इनाम: जब स्टेला ने घर लौटने की इच्छा जताई, तो माँ हले उसे एक सुनहरे दरवाजे पर ले गईं। जैसे ही वह निकली, उस पर सोने की वर्षा हुई और उसे उसकी खोई हुई तकली भी मिल गई।
बेला का लालच और अंजाम
स्टेला को सोने से लदा देख माँ ने बेला को भी कुएं में भेजा। बेला जादुई दुनिया में तो पहुँची, लेकिन अपने आलसी स्वभाव के कारण उसने न तो रोटियों की मदद की और न ही सेब के पेड़ की।
उसने माँ हले के घर काम तो शुरू किया, लेकिन दो दिन बाद ही आलस करने लगी और बिस्तर ठीक से नहीं झाड़ा। माँ हले ने उसे घर जाने को कहा। बेला खुश थी कि उसे भी सोना मिलेगा, लेकिन जैसे ही वह दरवाजे से निकली, उस पर सोने के बजाय काला कीचड़ और कूड़ा-करकट गिर गया। वह बदसूरत होकर घर लौटी और वह कालिख जीवन भर नहीं छूटी।
कहानी की सीख (Moral)
"मेहनत, ईमानदारी और दूसरों की मदद करने का स्वभाव इंसान को सोने जैसा कीमती बना देता है। इसके विपरीत, लालच और कामचोरी हमेशा अपमान और असफलता की ओर ले जाते हैं।"

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