"हँसमुख सरदार - एक रोचक कहानी जो सिखाती है कि अपनी कमियों को स्वीकार करना ही असली जीत है। जानिए कैसे एक बहादुर सरदार ने अपने गंजेपन का मजाक उड़ने पर सबको लाजवाब कर दिया।"
हँसमुख सरदार: जब अपनी ही हँसी ने जीत लिया सबका दिल
क्या आपने कभी सोचा है कि अपनी कमियों पर हँसना भी एक बहुत बड़ी ताकत हो सकती है? आइए पढ़ते हैं एक बहादुर सरदार की यह दिलचस्प कहानी, जो हमें जीवन का एक गहरा रहस्य सिखाती है।
वीर और उदार सरदार
पुराने समय की बात है, एक सरदार अपनी बहादुरी के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था। उसने अनगिनत युद्ध जीते थे और उसकी तलवारबाजी के किस्से हर जुबान पर थे। लेकिन वह केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कोमल हृदय इंसान भी था। गरीबों की मदद करना और मजलूमों का साथ देना वह अपना धर्म समझता था। प्रजा उसे सिर आँखों पर बिठाती थी।
खोपड़ी का गहरा राज
इतनी शोहरत और ताकत के बावजूद, सरदार के पास एक राज था जिसे उसने बरसों से दुनिया से छिपाकर रखा था। दरअसल, सरदार पूरी तरह से गंजा था। अपने इस गंजेपन को छिपाने के लिए वह एक बहुत ही बढ़िया 'विग' (बालों की टोपी) पहना करता था। वह टोपी उसके सिर पर इतनी सफाई से बैठती थी कि उसके सबसे करीबी दोस्तों को भी कभी शक नहीं हुआ।
जब आँधी ने खोला राज
एक दिन, सरदार अपने मित्रों के साथ घने जंगल में शिकार खेलने गया। सभी अपने घोड़ों पर सवार होकर हवा से बातें कर रहे थे। तभी अचानक मौसम बदला और धूल भरी तेज आँधी चलने लगी। इससे पहले कि सरदार अपनी टोपी संभाल पाता, एक जोरदार झोंके ने उसकी 'बालों वाली टोपी' उड़ाई और दूर झाड़ियों में फेंक दी।
पल भर में सरदार की चमकती हुई गंजी खोपड़ी सबके सामने थी। सरदार के दोस्त अपनी आँखों पर यकीन नहीं कर पाए। सन्नाटा छा गया और फिर वे सब जोर-जोर से ठहाके मार कर हँसने लगे।
एक दोस्त ने मजाक उड़ाते हुए कहा, "वाह सरदार! आपका सिर तो किसी अंडे की तरह सफाचट है। आप तो हम सबको अब तक जवान बनकर बेवकूफ बनाते रहे!"
एक यादगार जवाब
आमतौर पर कोई भी इंसान ऐसी स्थिति में गुस्से से लाल हो जाता या शर्मिंदा होकर वहाँ से भाग जाता। लेकिन सरदार अलग मिट्टी का बना था। वह बिल्कुल भी परेशान नहीं हुआ।
वह खिलखिलाकर हँसा और बोला— "हाँ मित्रों! मैं सचमुच गंजा हूँ। मैं अब तक इसे छिपाने की कोशिश कर रहा था, पर कुदरत ने आज मेरा राज खोल दिया। और सच तो यह है कि जब मेरे अपने सगे बालों ने मेरा साथ छोड़ दिया, तो दूसरों के उधार के बाल भला मेरे सिर पर कब तक टिकते?"
यह सुनते ही दोस्तों की हँसी रुक गई। उन्हें अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस होने लगी। सरदार की महानता देखकर वे दंग रह गए कि वह अपनी कमी पर खुद भी हँस सकता है। उन्होंने झुककर सरदार से कहा— "सरदार, आप न केवल एक वीर योद्धा हैं, बल्कि बहुत बड़े दिल वाले इंसान भी हैं।"
कहानी की सीख (The Moral)
"जो व्यक्ति अपनी कमियों को स्वीकार करना जानता है और स्वयं पर हँस सकता है, वह दुनिया में कभी हँसी का पात्र नहीं बनता। असली आत्मविश्वास अपनी वास्तविकता को स्वीकार करने में ही है।"
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