"माँ का प्यार - क्या परी ने बंदरिया के बच्चे को सबसे बदसूरत माना? जानिए कैसे एक माँ की ममता ने बाहरी सुंदरता के अहंकार को हरा दिया।"
माँ का प्यार: दुनिया का सबसे अनमोल पुरस्कार
क्या सुंदरता केवल शक्ल-सूरत में होती है? एक परी की चुनौती और एक बंदरिया की ममता ने यह साबित कर दिया कि असली सुंदरता तो प्रेम की आँखों में बसती है।
परी की अनोखी प्रतियोगिता
एक बार एक परी ने जंगल में एक प्रतियोगिता रखी। उसने घोषणा की— "जिस भी जीव का बच्चा सबसे सुंदर होगा, मैं उसे एक अद्भुत पुरस्कार दूँगी।" देखते ही देखते, पूरा जंगल सुंदर-सुंदर पशु-पक्षियों और उनके नन्हे शावकों से भर गया। हर कोई इनाम जीतने की आस में अपने बच्चों को सजाकर लाया था।
सुंदरता की परख
परी एक-एक करके सभी बच्चों को देख रही थी। किसी के पंख रंगीन थे, तो किसी की आँखें चमकीली। चलते-चलते परी एक बंदरिया के पास पहुँची। बंदरिया के बच्चे की नाक चपटी थी और वह दिखने में अन्य जानवरों जितना आकर्षक नहीं था।
परी ने मुँह बिगाड़ते हुए कहा— "छिः! कितना कुरूप और भद्दा बच्चा है यह! इसके माता-पिता को तो इनाम मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता।"
ममता का जवाब
परी की कड़वी बातें सुनकर बंदरिया की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने तुरंत अपने बच्चे को गले से लगा लिया और उसके माथे को चूमते हुए कहा—
"मेरे प्यारे लाल, तू बिलकुल चिंता मत कर! दुनिया की नज़र में तू कैसा भी हो, पर मेरी आँखों के लिए तू स्वर्ग का सबसे सुंदर फूल है। मेरे लिए तो तेरा जीवित रहना और तेरा साथ होना ही भगवान का दिया सबसे बड़ा पुरस्कार है। मुझे परी के किसी इनाम की ज़रूरत नहीं है।"
बंदरिया की यह ममता देखकर वहाँ मौजूद सभी जीव मौन हो गए। परी को भी अहसास हो गया कि माँ के दिल से बड़ा कोई पुरस्कार नहीं और उसकी ममता से सुंदर कोई चीज़ नहीं।
कहानी की सीख (The Moral)
"दुनिया की कोई भी चीज़ माँ के प्यार की बराबरी नहीं कर सकती।"
भावार्थ: सुंदरता देखने वाले की दृष्टि में होती है। एक माँ के लिए उसके बच्चे की कमियाँ भी उसकी विशेषता बन जाती हैं। निस्वार्थ प्रेम ही संसार का सबसे बड़ा वैभव है।
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