चिंतू और बेरवाला: नहले पर दहला
क्या आप किसी चालाक व्यक्ति को उसी की भाषा में जवाब दे सकते हैं? मिलिए चिंतू से, जिसने अपनी हाज़िरजवाबी से एक मक्कार दुकानदार की बोलती बंद कर दी।
बेरवाले की बेईमानी
चिंतू अपने मोहल्ले का सबसे होशियार और निडर लड़का था। एक दिन उसने गली में बेर बेचने वाले को रोका और कुछ बेर खरीदे। बेरवाला थोड़ा लालची था। उसने सोचा कि यह तो छोटा बच्चा है, इसे क्या पता चलेगा। उसने तराजू में डंडी मारी और चिंतू को वजन में कम बेर दिए।
चिंतू की तेज़ नज़रों ने यह देख लिया। उसने तुरंत टोकते हुए पूछा— "अरे भाई! आपने मुझे कम बेर क्यों दिए हैं?"
बेरवाले ने बहुत मासूम बनते हुए बड़ी मक्कारी से जवाब दिया— "बेटा, मैंने कम बेर इसलिए दिए हैं ताकि तुम्हें घर ले जाने में आसानी हो और बोझ कम लगे।"
चिंतू का करारा जवाब
चिंतू बेरवाले की मंशा समझ गया। उसने बिना गुस्सा किए अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले, बेरवाले की हथेली पर रखे और तेज़ी से आगे बढ़ने लगा।
बेरवाले ने जब पैसे गिने, तो वह हैरान रह गया। पैसे बेर की कीमत से काफी कम थे। उसने ज़ोर से आवाज़ लगाई— "ओ लड़के! रुक, इधर आ। तूने मुझे पैसे कम क्यों दिए हैं?"
चिंतू रुका, पीछे मुड़ा और मुस्कुराते हुए बोला:
"अरे भाई! मैंने कम पैसे इसलिए दिए हैं ताकि आपको गिनने में आसानी हो और बोझ कम लगे!"
बेरवाला हक्का-बक्का रह गया। उसे समझ आ गया कि इस छोटे से लड़के ने उसे उसी की चाल में फँसा दिया है।
कहानी की सीख (The Moral)
"चालाक के साथ चालाकी नहीं चलती। जो दूसरों को ठगने की कोशिश करते हैं, उन्हें अक्सर खुद भी उसी कड़वे अनुभव से गुजरना पड़ता है। ईमानदारी ही सबसे अच्छी नीति है।"

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