"डब्बू और नाई - जब डब्बू ने नाई से दाढ़ी बनाने को कहा, तो नाई ने उसे कैसे सबक सिखाया? पढ़िए यह गुदगुदाने वाली प्रेरक कहानी।"
डब्बू और नाई: जब होशियारी पड़ी भारी
क्या आप खुद को बहुत होशियार समझते हैं? मिलिए डब्बू से, जिसने एक अनुभवी नाई का मज़ाक उड़ाने की कोशिश की, लेकिन बदले में उसे ऐसा सबक मिला कि उसकी बोलती बंद हो गई।
डब्बू की शरारत और नाई की दुकान
डब्बू अपनी उम्र से ज़्यादा चतुर बनने की कोशिश करता था। एक सुबह उसे कुछ तूफानी करने की सूझी। वह सीधा नाई की दुकान पर पहुँचा और किसी बड़े रईस की तरह कुर्सी पर जाकर बैठ गया। नाई ने मुस्कुराते हुए पूछा— "कहो डब्बू मियां, आज सुबह-सुबह यहाँ कैसे आना हुआ?"
डब्बू ने बड़े रोब से जवाब दिया— "ज़रा मेरी दाढ़ी बना दो!" नाई समझ गया कि यह छोटा बच्चा केवल उसका समय बर्बाद करने और मज़ाक उड़ाने आया है। नाई भी पुराना खिलाड़ी था, उसने बिना गुस्सा किए कहा— "हाँ-हाँ, क्यों नहीं सरकार! अभी बनाता हूँ।"
झागदार चेहरा और लंबा इंतज़ार
नाई ने तुरंत डब्बू के कंधों पर तौलिया लपेटा और उसके छोटे से चिकने चेहरे पर खूब सारा झागदार साबुन लगा दिया। डब्बू मन ही मन खुश हो रहा था कि उसने नाई को बेवकूफ बना दिया। लेकिन साबुन लगाने के बाद नाई चुपचाप किनारे हट गया और अपनी दुकान के दूसरे कामों में व्यस्त हो गया।
पाँच मिनट बीते, दस मिनट बीते... डब्बू के चेहरे पर लगा साबुन सूखने लगा और उसकी आँखों में जलन होने लगी। इतनी देर तक चुपचाप बैठे रहना उसके बस की बात नहीं थी।
नाई का लाजवाब जवाब
आख़िरकार डब्बू का धैर्य जवाब दे गया। उसने चिल्लाकर कहा— "अरे भाई! तुमने मुझे इस तरह साबुन लगाकर क्यों बिठा रखा है? मेरी दाढ़ी बनाते क्यों नहीं?"
नाई ने बड़े आराम से पलटकर देखा और हँसते हुए कहा:
"अरे छोटे उस्ताद, परेशान क्यों होते हो? मैं तो बस तुम्हारी दाढ़ी उगने का इंतज़ार कर रहा हूँ। जैसे ही बाल बाहर आएंगे, मैं उसे साफ कर दूँगा!"
डब्बू का चेहरा शर्म से लाल हो गया। उसे समझ आ गया कि नाई ने उसकी ही भाषा में उसे करारा जवाब दिया है।
कहानी की सीख (The Moral)
"जो दूसरों का मज़ाक उड़ाने की कोशिश करते हैं, वे अक्सर खुद मज़ाक का पात्र बन जाते हैं। अपनी चतुराई का प्रयोग दूसरों को नीचा दिखाने के लिए नहीं करना चाहिए।"
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