"लालची बंटी - कैसे टॉफियों के मर्तबान में बंटी का हाथ फँस गया? पढ़िए बच्चों के लिए यह मजेदार कहानी जो लालच न करने की सीख देती है।"
लालची बंटी: मर्तबान में फँसा हाथ
क्या आपने कभी किसी ऐसी चीज़ को पाने की कोशिश की है जो आपके हाथ से बड़ी हो? मिलिए बंटी से, जिसने ढेर सारी टॉफियों के लालच में खुद को एक अजीब मुसीबत में डाल लिया।
टॉफियों का खजाना
बंटी एक नन्हा लड़का था जिसे मिठाइयाँ और टॉफियाँ बहुत पसंद थीं। एक दिन जब वह अपनी मौसी के घर गया, तो मौसी ने उसके लिए टॉफियों से भरा एक बड़ा काँच का मर्तबान निकाला। उन्होंने मुस्कुराकर कहा— "बंटी, जितनी चाहो उतनी टॉफियाँ ले लो!"
लालच का नतीजा
इतनी सारी रंग-बिरंगी टॉफियाँ देखकर बंटी की आँखों में चमक आ गई। उसने झट से मर्तबान में हाथ डाला और जितनी टॉफियाँ उसकी मुट्ठी में आ सकती थीं, उतनी पकड़ लीं। लेकिन जैसे ही उसने हाथ बाहर निकालने की कोशिश की, उसका हाथ मर्तबान के संकरे मुँह में फँस गया।
मुट्ठी टॉफियों से भरी होने के कारण मर्तबान के मुँह से बड़ी हो गई थी। बंटी ने ज़ोर लगाया, मर्तबान को हिलाया-डुलाया, लेकिन उसका हाथ बाहर नहीं निकला। वह परेशान होकर रोने लगा।
माँ की समझदारी भरी सलाह
बंटी की माँ यह सब देख रही थीं। उन्होंने प्यार से समझाया— "बेटा! अगर तुम सारी टॉफियाँ एक साथ निकालने की कोशिश करोगे, तो हाथ कभी बाहर नहीं आएगा। अपनी मुट्ठी खोलो और कुछ टॉफियाँ मर्तबान में ही गिरा दो। फिर देखो तुम्हारा हाथ कितनी आसानी से बाहर आता है।"
बंटी ने वैसा ही किया। उसने आधी टॉफियाँ छोड़ दीं और उसकी मुट्ठी छोटी हो गई। देखते ही देखते उसका हाथ बाहर निकल आया। बंटी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने शांति से कुछ टॉफियाँ लेकर उनका आनंद लिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"पेटू बनना और लालच करना अच्छा नहीं है।"
भावार्थ: यदि हम एक ही बार में सब कुछ पाने की ज़िद करेंगे, तो हमारे पास जो है वह भी खतरे में पड़ सकता है। संतोष और बुद्धिमानी से काम लेना ही सफलता की कुंजी है।
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