"चतुर ज्योतिषी - जब राजा ने ज्योतिषी से उसकी मौत का दिन पूछा, तो उसने क्या जवाब दिया? पढ़िए कैसे एक चतुर उत्तर ने ज्योतिषी की जान बचाई।"
चतुर ज्योतिषी: जब शब्दों ने बचाई जान
क्या कोई अपनी मौत की भविष्यवाणी करके अपनी उम्र बढ़ा सकता है? यह कहानी एक ऐसे ज्योतिषी की है जिसने बादशाह के क्रोध को अपनी चतुराई से शांत कर दिया और मौत के मुँह से बाहर निकल आया।
भविष्यवाणी और सम्राट का क्रोध
एक प्रतापी सम्राट ने अपनी कुंडली दिखाने के लिए एक नामी ज्योतिषी को बुलाया। ज्योतिषी ने पहले तो सम्राट के वैभव और जीत के बारे में बताया, जिसे सुनकर सम्राट बहुत प्रसन्न हुए। लेकिन जैसे ही ज्योतिषी ने आने वाले संकटों और दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का ज़िक्र किया, सम्राट का पारा चढ़ गया।
क्रोध में आकर सम्राट ने ज्योतिषी को नीचा दिखाने और उसे मृत्युदंड देने के बहाने से एक टेढ़ा सवाल पूछा— "पंडित जी, आप दूसरों का भविष्य तो बहुत बताते हैं, ज़रा यह बताइए कि आपके ग्रहों के अनुसार आपकी अपनी मृत्यु कब होगी?"
मौत के साये में बुद्धिमत्ता
ज्योतिषी तुरंत समझ गया कि सम्राट उसे अभी मार डालने का बहाना ढूँढ रहे हैं। यदि उसने कोई भी तारीख बताई, तो सम्राट उसे उसी वक्त मारकर उसकी भविष्यवाणी को सच (या गलत) साबित कर देते।
ज्योतिषी ने एक गहरी सांस ली और बड़े शांत स्वर में कहा—
"महाराज, मैंने अपनी गणना कर ली है। मेरी मृत्यु आपकी मृत्यु से ठीक एक दिन पहले लिखी है।"
पासा पलट गया
यह सुनते ही सम्राट के हाथ-पाँव फूल गए। अब ज्योतिषी को मारना मतलब अपनी मौत को दावत देना था। सम्राट का गुस्सा पल भर में गायब हो गया और उसकी जगह डर ने ले ली। अब सम्राट की भलाई इसी में थी कि ज्योतिषी लंबी उम्र जिए और स्वस्थ रहे, ताकि सम्राट खुद सुरक्षित रहें।
सम्राट ने ज्योतिषी की इस अद्भुत हाजिरजवाबी की सराहना की और उसे दंड देने के बजाय कीमती उपहारों के साथ विदा किया।
कहानी की सीख (The Moral)
"बुद्धिमत्ता और वाकपटुता से बड़े-से-बड़े संकट को टाला जा सकता है।"
भावार्थ: कठिन परिस्थितियों में घबराने के बजाय अपनी बुद्धि का प्रयोग करें। सही समय पर सही बात कहना ही सबसे बड़ी कला है।
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