"चंडूल और किसान - दूसरों के भरोसे बैठे रहने से क्या होता है? जानिए क्यों चंडूल चिड़िया ने किसान के खुद काम करने के फैसले पर ही अपना घोंसला बदला।"
चंडूल और किसान: आत्मनिर्भरता की जीत
क्या आप भी अपने काम के लिए दूसरों की राह देखते हैं? यह कहानी एक छोटी सी चंडूल चिड़िया की है, जिसने अपने बच्चों को जीवन का वह सत्य सिखाया जिसे बड़े-बड़े विद्वान भी नहीं समझ पाते।
खेत में घोंसला और किसान की चेतावनी
मक्के के एक लहलहाते खेत में चंडूल चिड़िया अपने नन्हे बच्चों के साथ रहती थी। फसल पक चुकी थी। एक दिन किसान खेत आया और बोला— "फसल कटने को तैयार है, कल मैं अपने रिश्तेदारों को बुलाऊँगा और कटाई शुरू करूँगा।"
बच्चे डर गए और माँ से घर छोड़ने की ज़िद करने लगे। चंडूल मुस्कुराई और बोली— "डरो मत बच्चों, अभी फसल नहीं कटेगी।"
दूसरों का भरोसा और असफलता
अगले दिन किसान के रिश्तेदार नहीं आए। किसान ने फिर घोषणा की— "कल मैं अपने पड़ोसियों को लेकर आऊँगा।" बच्चे फिर घबराए, पर माँ ने फिर वही कहा— "अभी घबराने की ज़रूरत नहीं है।" और जैसा चंडूल ने सोचा था, पड़ोसी भी नहीं आए।
जब किसान ने लिया संकल्प
तीसरे दिन किसान ने तंग आकर कहा— "दूसरों के भरोसे रहने से काम नहीं चलेगा। कल मैं खुद अपनी दरांती लेकर आऊँगा और फसल काटूँगा।"
जैसे ही चंडूल ने यह सुना, उसने तुरंत बच्चों से कहा— "बच्चों, अब यहाँ से चलने का समय आ गया है। कल फसल निश्चित रूप से कटेगी।"
सच्चाई का अहसास
बच्चे हैरान थे। उन्होंने पूछा— "माँ, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के समय तो आप बेफिक्र थीं, पर अब आप क्यों डर रही हैं?" चंडूल ने समझाया— "बेटा! जब तक वह दूसरों के भरोसे था, उसे काम पूरा होने का यकीन नहीं था। लेकिन अब उसने खुद काम करने का निश्चय किया है, और जो व्यक्ति खुद काम शुरू करता है, उसका काम कभी नहीं रुकता।"
कहानी की सीख (The Moral)
"अपना काम अपने ही भरोसे होता है।"
भावार्थ: स्वावलंबन ही सबसे बड़ी शक्ति है। जो लोग दूसरों की मदद का इंतज़ार करते हैं, उनका समय व्यर्थ जाता है। वास्तविक प्रगति तभी होती है जब आप अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं।
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