"राजा सोलोमन और शिबा की रानी - कैसे मधुमक्खियों ने राजा को असली हार पहचानने में मदद की? पढ़िए बुद्धि और विवेक की यह अद्भुत कहानी।"
राजा सोलोमन की बुद्धिमत्ता: असली और नकली फूलों की परीक्षा
क्या कोई केवल दूर से देखकर असली और कृत्रिम फूलों के बीच का अंतर बता सकता है? शिबा की रानी ने जब इज़राइल के राजा सोलोमन की बुद्धिमत्ता को चुनौती दी, तो राजा ने अपनी आँखों से ज़्यादा अपने ज्ञान पर भरोसा किया।
रानी की चुनौती
शिबा की रानी राजा सोलोमन के ज्ञान की ख्याति सुनकर उनके दरबार में पहुँची। उनके दोनों हाथों में फूलों के दो अत्यंत सुंदर हार थे। दोनों हार देखने में इतने समान थे कि कोई भी कुशल कारीगर धोखा खा जाए। रानी ने चुनौती देते हुए कहा—
"हे राजन! इन दोनों में से एक हार असली सुगंधित फूलों का है और दूसरा कागज़ के फूलों का। आपको अपने सिंहासन से उठे बिना और हारों को छुए बिना यह बताना है कि असली हार कौन सा है?"
बुद्धि का प्रयोग
दरबार में सन्नाटा छा गया। सभी दरबारी दोनों हारों को एकटक देख रहे थे, पर उनमें रत्ती भर भी अंतर नज़र नहीं आ रहा था। राजा सोलोमन ने कुछ पल मौन रहकर विचार किया और फिर पास की खिड़की की ओर इशारा करते हुए अपने सेवक को आदेश दिया— "बगीचे की ओर खुलने वाली खिड़कियाँ खोल दी जाएँ।"
प्रकृति ने दिया न्याय
जैसे ही खिड़कियाँ खुलीं, ताज़ी हवा के साथ बगीचे की कुछ मधुमक्खियाँ उड़ती हुई दरबार में आ गईं। वे सीधे रानी के दाहिने हाथ में पकड़े हुए हार पर जाकर मंडराने लगीं।
राजा सोलोमन मुस्कुराए और बोले— "रानी साहिबा, प्रकृति कभी झूठ नहीं बोलती। मधुमक्खियाँ कागज़ पर नहीं, बल्कि फूलों के रस की ओर खिंची चली आती हैं। अतः आपके दाहिने हाथ का हार ही असली है।" शिबा की रानी राजा के इस विवेक और हाज़िरजवाबी से अत्यंत प्रभावित हुईं और उनकी बुद्धिमत्ता का लोहा मान लिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"जहाँ आँखें निर्णय लेने में असमर्थ हों, वहाँ ज्ञान और सूक्ष्म निरीक्षण से काम लेना चाहिए।"
भावार्थ: बाहरी चमक-धमक अक्सर हमारी आँखों को भ्रमित कर सकती है, लेकिन गहरी समझ और तार्किक सोच हमेशा सत्य को उजागर कर देती है।
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