कंजूस करोड़ीमल: मुफ्त के नारियल की भारी कीमत
क्या कुछ पैसे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालना समझदारी है? मिलिए कंजूस करोड़ीमल से, जिन्होंने एक नारियल बचाने के चक्कर में जो गँवाया, वह नारियल की कीमत से कहीं अधिक था।
चार रुपये से पचास पैसे का सफर
करोड़ीमल नाम का एक व्यक्ति अपनी कंजूसी के लिए मशहूर था। एक दिन उसे नारियल पानी पीने की इच्छा हुई। वह बाजार गया, जहाँ नारियल की कीमत 4 रुपये थी। करोड़ीमल को यह बहुत महंगा लगा। दुकानदार ने कहा कि एक मील दूर यह 3 रुपये में मिल जाएगा।
करोड़ीमल ने सोचा, "पैसे मेहनत से आते हैं, एक मील चलने में क्या बुराई है?" वह एक मील चला, जहाँ कीमत 3 रुपये थी। वहाँ भी उसने मोलभाव किया और दुकानदार के कहने पर एक और मील चलकर 2 रुपये वाले स्थान पर पहुँचा। लालच बढ़ता गया और वह एक और मील चलकर समुद्र तट पर जा पहुँचा, जहाँ नारियल की कीमत मात्र 1 रुपया थी।
मुफ्त का लालच और ऊँची उड़ान
समुद्र तट पर पहुँचकर भी करोड़ीमल का मन नहीं भरा। उसने दुकानदार से कहा, "मैं तो केवल 50 पैसे दूँगा!" तंग आकर दुकानदार ने कहा, "सामने पेड़ पर चढ़ जाओ, वहाँ तुम्हें मुफ्त में नारियल मिल जाएँगे।"
करोड़ीमल खुश हो गए। उन्होंने सोचा, "पैसा भी बचेगा और ताज़ा नारियल भी मिलेगा!" वे फुर्ती से नारियल के ऊँचे पेड़ पर चढ़ गए। उन्होंने एक बड़े नारियल को दोनों हाथों से पकड़ा और ज़ोर का झटका दिया।
कंजूसी का कड़वा नतीजा
नारियल तो हाथ में आ गया, लेकिन झटके के कारण पेड़ से उनके पैरों की पकड़ छूट गई। करोड़ीमल नारियल सहित सीधे नीचे रेत पर आ गिरे। परिणाम यह हुआ कि नारियल तो मिला, लेकिन उनके पैर की हड्डी टूट गई और शरीर लहूलुहान हो गया। अब अस्पताल के खर्च के सामने वह बचाए हुए कुछ रुपये बहुत छोटे लगने लगे।
कहानी की सीख (The Moral)
"लालच बुरी बला है।"
भावार्थ: आवश्यकता से अधिक बचत करने की कोशिश और मुफ्त की चीज़ों का लालच अक्सर हमें ऐसे संकट में डाल देता है, जहाँ हमें अपनी बचत से कई गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।

0 Comments