"काजू खाने वाला लड़का - क्या लालच में आकर माँ की बात न मानना सही था? पढ़िए यह प्रेरक कहानी जो बच्चों को संयम और आज्ञा पालन का पाठ सिखाती है।"
काजू खाने वाला लड़का: माँ की बात न मानने का कड़वा फल
क्या आपको भी अपनी पसंद की चीज़ ढेर सारी खाने का मन करता है? यह कहानी एक ऐसे लड़के की है, जिसकी एक छोटी सी ज़िद ने उसे बड़ी मुसीबत में डाल दिया।
काजू के प्रति मोह और माँ की सीख
एक छोटा लड़का था, जिसे काजू बहुत ज़्यादा पसंद थे। वह जब भी काजू देखता, उसका मन ललचा जाता। उसकी माँ उसे रोज़ गिनती के थोड़े से काजू खाने को देती थीं। लड़का हमेशा माँ से और ज़्यादा काजू माँगने की ज़िद करता, पर माँ उसे प्यार से समझातीं—
"बेटा, एक साथ बहुत ज़्यादा काजू खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं है। अगर तुम ज़रूरत से ज़्यादा खाओगे, तो तुम्हारे पेट में दर्द हो जाएगा।"
लड़का उस समय तो मान जाता, लेकिन मन ही मन उसे लगता कि माँ उसे जानबूझकर कम काजू देती हैं।
लालच और अकेलेपन का मौका
एक दिन उसकी माँ किसी काम से बाहर गई हुई थीं और लड़का घर पर बिल्कुल अकेला था। उसने सोचा कि आज तो उसे रोकने वाला कोई नहीं है। उसने झटपट अलमारी से काजू का डिब्बा नीचे उतारा।
उसने बिना सोचे-समझे मुट्ठी भर-भरकर काजू खाने शुरू कर दिए। उसने इतने काजू खाए कि उसका पेट पूरी तरह भर गया। उस समय तो उसे बहुत मज़ा आया, लेकिन वह माँ की चेतावनी को पूरी तरह भूल चुका था।
पछतावा और बीमारी
अगली सुबह जब लड़का उठा, तो उसकी हालत खराब थी। उसके पेट में बहुत तेज़ दर्द हो रहा था और वह बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहा था। वह रोने लगा और उसे तुरंत अपनी माँ की याद आई।
उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था। उसे समझ आ गया कि माँ उसे कम काजू खाने को इसलिए कहती थीं क्योंकि वे उसकी भलाई चाहती थीं। उसने मन ही मन तय किया कि वह अब से हमेशा अपनी माँ की बात मानेगा।
कहानी की सीख (The Moral)
"माता-पिता हमारे सबसे बड़े शुभचिंतक होते हैं। वे हमें जो भी सलाह देते हैं, उसके पीछे हमारा ही भला छिपा होता है। बड़ों का कहना मानने से हम कई बड़ी मुसीबतों से बच सकते हैं।"
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