"भेड़िया आया - क्या एक छोटा सा झूठ जानलेवा हो सकता है? पढ़िए गड़रिये और भेड़िए की यह कहानी जो हमें ईमानदारी का महत्व सिखाती है।"
भेड़िया आया! भेड़िया आया!: एक छोटे झूठ की बड़ी कीमत
क्या आपने कभी केवल मनोरंजन के लिए झूठ बोला है? यह प्रसिद्ध कहानी एक ऐसे लड़के की है, जिसका मज़ाक अंत में उसकी सबसे बड़ी मुसीबत बन गया।
शरारत और झूठी पुकार
एक गड़रिया लड़का रोज़ अपनी भेड़ों को जंगल में चराने ले जाता था। दिन भर अकेला रहने के कारण उसे बहुत बोरियत महसूस होती थी। एक दिन अपना मन बहलाने के लिए उसने एक खतरनाक मज़ाक करने की सोची।
वह अचानक ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा— "बचाओ! बचाओ! भेड़िया आया! भेड़िया आया!"
पास के खेतों में काम कर रहे किसान लड़के की चीख सुनकर अपनी कुल्हाड़ी और डंडे लेकर उसकी मदद के लिए दौड़े। लेकिन वहाँ पहुँचने पर उन्होंने देखा कि लड़का आराम से बैठा हँस रहा है। वहाँ कोई भेड़िया नहीं था। लड़के ने हँसते हुए कहा, "मैं तो बस मज़ाक कर रहा था!" किसान उसे भला-बुरा कहकर वापस चले गए।
बार-बार का मज़ाक और टूटा विश्वास
कुछ दिनों बाद, लड़के ने फिर वही मज़ाक दोहराया। किसान फिर से दौड़े आए और फिर से खाली हाथ लौटे। इस बार किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने तय कर लिया कि अब इस लड़के की बातों पर कभी यकीन नहीं करेंगे।
जब हकीकत बनी मुसीबत
एक दिन शाम के समय, सचमुच एक खूँखार भेड़िया जंगल से निकल आया। लड़का डर के मारे काँपने लगा और जान बचाने के लिए एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया। वह पूरी ताकत लगाकर चिल्लाया— "बचाओ! सचमुच भेड़िया आ गया है! कोई आओ!"
किसानों ने आवाज़ सुनी, लेकिन उन्होंने आपस में कहा, "यह वही बदमाश लड़का है, फिर से हमें बेवकूफ बना रहा है। आज हम इसके मज़ाक में नहीं फँसेंगे।" कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं गया। भेड़िए ने कई भेड़ों को मार डाला और लड़का पेड़ पर चढ़ा अपनी बेबसी पर रोता रहा।
कहानी की सीख (The Moral)
"झूठे व्यक्ति की सच्ची बात पर भी कोई विश्वास नहीं करता। एक बार विश्वास टूट जाए, तो उसे दोबारा पाना बहुत कठिन होता है। मज़ाक में भी कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए।"
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