"मछुआ और मंत्री - जब मंत्री ने माँगा इनाम में आधा हिस्सा, तो मछुए ने उसे कैसा सबक सिखाया? पढ़िए यह दिलचस्प और शिक्षाप्रद कहानी।"
मछुआ और मंत्री: बेईमानी का अनोखा दंड
क्या कोई इनाम में कोड़े माँग सकता है? यह कहानी एक चतुर मछुए की है, जिसने अपने अनोखे इनाम के ज़रिए एक भ्रष्ट मंत्री का असली चेहरा राजा के सामने ला दिया।
राजा की घोषणा और मछुए का साहस
एक राजा को ताज़ी मछलियाँ खाने का बहुत शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया, जिसके कारण कोई भी मछुआरा समुद्र में जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। राजा ने घोषणा करवाई कि जो भी आज ताज़ी मछली लाएगा, उसे मुँहमाँगा इनाम दिया जाएगा।
एक गरीब मछुए ने अपनी जान जोखिम में डाली और समुद्र से मछलियाँ पकड़कर राजमहल पहुँचा। लेकिन महल के द्वार पर लालची मंत्री ने उसे रोक लिया।
मंत्री की शर्त और मछुए की युक्ति
मंत्री ने मछुए के सामने एक शर्त रखी— "मैं तुम्हें राजा से तभी मिलने दूँगा, जब तुम अपने इनाम का आधा हिस्सा मुझे दोगे।" मछुआ समझ गया कि मंत्री बेईमान है। उसने मन मारकर शर्त स्वीकार कर ली और राजा के सामने पेश हुआ।
राजा ताज़ी मछलियाँ देखकर बहुत खुश हुए और बोले— "माँगों क्या इनाम माँगते हो?" मछुए ने सबको चौंकाते हुए कहा— "महाराज, मैं चाहता हूँ कि मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ।"
अनोखा बँटवारा और मंत्री का अंत
मछुए की अजीब मांग सुनकर सब हैरान थे। राजा के आदेश पर जब नौकर ने मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा दिए, तो मछुआ चिल्लाया— "ठहरिए महाराज! बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझीदार (Partner) के हिस्से के हैं।"
राजा ने हैरानी से पूछा— "कौन है तुम्हारा साझीदार?"
मछुए ने निडर होकर कहा— "महाराज, आपके मंत्री जी ही मेरे साझीदार हैं। उन्होंने मुझसे आधा इनाम लेने का वादा लिया है।"
यह सुनते ही राजा क्रोध से भर गए। उन्होंने तुरंत मंत्री को बुलवाया और आदेश दिया— "मंत्री को बाकी के पच्चीस कोड़े ज़ोर-ज़ोर से लगाओ!" कोड़े खाने के बाद बेईमान मंत्री को जेल भेज दिया गया और राजा ने मछुए की बहादुरी और बुद्धिमानी के लिए उसे ढेर सारा धन और पुरस्कार दिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"जैसी करनी वैसी भरनी (As you sow, so shall you reap)। दूसरों के हक पर नज़र रखने वाले और बेईमानी करने वाले लोगों को अंत में अपमान और दंड ही मिलता है।"
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