बिल्ली और लोमड़ी: सौ तरकीबें बनाम एक अचूक उपाय
क्या बहुत सारे विकल्प होना हमेशा फायदेमंद होता है? बिल्ली और लोमड़ी की यह बातचीत हमें सिखाती है कि संकट के समय भ्रमित करने वाले सौ रास्तों से बेहतर एक सुरक्षित रास्ता होता है।
शेखी बघारती लोमड़ी
एक बार एक लोमड़ी और एक बिल्ली आपस में बातें कर रही थीं। लोमड़ी को अपनी चतुराई पर बड़ा घमंड था। उसने बिल्ली से कहा— "मुझे शिकारी कुत्तों से डर नहीं लगता। मेरे पास उनसे बचने की सौ तरकीबें हैं। कभी मैं काँटेदार झाड़ियों में छिप जाती हूँ, कभी अपनी माँद में घुस जाती हूँ, तो कभी टेढ़े-मेढ़े रास्तों से उन्हें चकमा दे देती हूँ।"
बिल्ली का सीधा सा जवाब
बिल्ली ने बड़ी सादगी से कहा— "भाई, मुझे तो बस एक ही तरीका आता है, लेकिन वह हमेशा काम करता है।" लोमड़ी ने उसका मज़ाक उड़ाते हुए कहा— "सिर्फ एक तरीका? बड़े दुख की बात है! वह क्या है?"
परीक्षा की घड़ी
तभी दूर से शिकारी कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आई। शिकारी कुत्ते तेज़ी से उसी दिशा में बढ़ रहे थे। बिल्ली ने तुरंत अपनी 'एकमात्र' तरकीब पर अमल किया और फुर्ती से पास के एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गई। वह सुरक्षित थी।
दूसरी ओर, लोमड़ी अपनी सौ तरकीबों के बीच उलझ गई। वह कभी झाड़ियों की ओर भागती, कभी गड्ढों की ओर, कभी मुड़ती तो कभी छिपती। वह तय ही नहीं कर पाई कि कौन सा तरीका सबसे अच्छा है। कुत्तों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और उसका अंत कर दिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"अनेक अधूरी तरकीबें आज़माने की बजाय एक ही सधी हुई तरकीब पर भरोसा करना चाहिए।"
भावार्थ: विशेषज्ञता (Specialization) भ्रम से बचाती है। संकट के समय निर्णय लेने की स्पष्टता (Clarity of decision) ही आपकी जान बचा सकती है।

0 Comments