"बदसूरत ऊँट - क्या ऊँट दूसरों का मज़ाक उड़ाकर खुद को सुंदर साबित कर सका? पढ़िए लोमड़ी और ऊँट की यह मजेदार कहानी जो हमें अपनी कमियाँ देखना सिखाती है।"
बदसूरत ऊँट: दूसरों को आईना दिखाने वाले की हार
क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों की बुराई करने वाला व्यक्ति खुद कैसा दिखता होगा? यह कहानी एक ऐसे ऊँट की है जो खुद को 'सर्वश्रेष्ठ' समझता था, जब तक कि उसका सामना सच के आईने से नहीं हुआ।
ऊँट का अहंकार और दूसरों की निंदा
एक जंगल में एक ऊँट रहता था, जिसका पसंदीदा काम दूसरों की शक्ल-सूरत का मज़ाक उड़ाना था। उसे लगता था कि भगवान ने बाकी सभी जानवरों को बनाने में कोई न कोई गलती की है।
गाय से: "तुम तो बस हड्डियों का ढांचा हो, ऐसा लगता है जैसे तुम्हारी खाल अभी फट जाएगी।"
भैंस से: "तुम इतनी काली और तुम्हारे सींग इतने टेढ़े क्यों हैं? तुम बहुत बदसूरत दिखती हो।"
हाथी से: "तुम्हारा शरीर बेढंगा है। इतनी छोटी आँखें और सूप जैसे कान! तुम तो किसी कार्टून जैसे लगते हो।"
तोते से: "तुम्हारी चोंच इतनी टेढ़ी और लाल क्यों है? विधाता ने तुम्हारे साथ मज़ाक किया है।"
जब लोमड़ी ने दिखाया आईना
जंगल के सभी जानवर ऊँट की कड़वी बातों से परेशान थे। एक दिन ऊँट की मुलाकात एक चतुर और मुँहफट लोमड़ी से हुई। ऊँट जैसे ही मुँह खोलकर लोमड़ी की बुराई करने वाला था, लोमड़ी ने उसे बीच में ही टोक दिया।
लोमड़ी बड़े बेबाक अंदाज़ में बोली— "अरे ऊँट भाई! दूसरों की नुक्ताचीनी (बुराई) करने से पहले ज़रा अपनी सूरत तो देखो! तुम्हारा यह लंबा और बेढब चेहरा, पीले गंदे दाँत, टेढ़े-मेढ़े पैर और तुम्हारी पीठ पर वह अजीब सा कूबड़। सच तो यह है कि पूरे जंगल में तुमसे ज़्यादा बदसूरत और असंतुलित शरीर वाला कोई दूसरा जानवर नहीं है। दूसरों में तो एक-दो कमियां हैं, पर तुम तो कमियों का पुतला हो!"
शर्म और अहसास
लोमड़ी की यह खरी-खरी सुनकर ऊँट का सारा घमंड चूर-चूर हो गया। उसे पहली बार अहसास हुआ कि जब वह दूसरों पर एक उंगली उठाता है, तो तीन उंगलियां उसकी अपनी तरफ होती हैं। वह शर्म के मारे सिर झुकाकर वहाँ से चुपचाप चला गया।
कहानी की सीख (The Moral)
"दूसरों की कमियाँ ढूँढ़ने के पहले अपनी कमियों पर नज़र डालिए।"
भावार्थ: कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता। दूसरों की आलोचना करने से पहले हमें अपनी गलतियों और कमियों को सुधारने का प्रयास करना चाहिए।
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