शेर का हिस्सा: जिसकी लाठी उसकी भैंस
क्या साझेदारी में हमेशा बराबरी का हक मिलता है? यह कहानी एक शेर और उसके तीन साथियों की है, जहाँ मेहनत तो सबने मिलकर की, लेकिन फल केवल सबसे ताकतवर ने समेटा।
साझा शिकार और लोमड़ी की मेहनत
एक बार एक रीछ, एक भेड़िया, एक लोमड़ी और एक शेर ने मिलकर शिकार करने की योजना बनाई। चारों ने मिलकर एक बड़ी भैंस का शिकार किया। शिकार सफल होने के बाद, लोमड़ी ने ईमानदारी से भैंस के चार बराबर हिस्से किए ताकि सभी अपना-अपना पेट भर सकें।
शेर का कुतर्क और दादागिरी
जैसे ही बाकी जानवर खाने के लिए आगे बढ़े, शेर ने भयानक दहाड़ मारी और सबको पीछे धकेल दिया। उसने एक-एक करके चारों हिस्सों पर अपना दावा ठोंक दिया:
- पहला हिस्सा: "यह मेरा है, क्योंकि मैं इस शिकार में तुम्हारा साझेदार था।"
- दूसरा हिस्सा: "यह भी मेरा है, क्योंकि मैं इस झुंड का अगुआ और राजा हूँ।"
- तीसरा हिस्सा: "यह मुझे अपने बच्चों के लिए चाहिए, इसलिए इस पर हाथ मत लगाना।"
- चौथा हिस्सा: "अब जो यह आखिरी टुकड़ा बचा है, अगर किसी में साहस है तो वह मुझसे युद्ध करे और इसे जीत कर ले जाए।"
शक्ति के सामने आत्मसमर्पण
रीछ, भेड़िया और लोमड़ी जानते थे कि वे अकेले या मिलकर भी शेर का मुकाबला नहीं कर सकते। अपनी जान बचाने के लिए उन्होंने अपना हक छोड़ देना ही बेहतर समझा। वे तीनों भूखे ही वहाँ से चुपचाप खिसक गए और शेर ने पूरे शिकार पर अकेले कब्जा कर लिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"जिसकी लाठी उसकी भैंस।"
भावार्थ: शक्तिशाली के सामने कमज़ोर का तर्क और अधिकार अक्सर बेअसर हो जाते हैं। यह कहानी हमें आगाह करती है कि किसी भी साझेदारी को करने से पहले अपने साथी की नीयत और उसकी शक्ति का सही आकलन करना बहुत ज़रूरी है।

0 Comments