"गधे का दिमाग - क्या गधे के पास सच में दिमाग नहीं होता? पढ़िए सियार की वह चतुराई जिसने बीमार शेर को भी सोच में डाल दिया।"
गधे का दिमाग: सियार की कुटिल चतुराई
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी के पास दिमाग ही न हो, तो क्या होगा? इस मजेदार और तीखी कहानी में एक सियार ने अपनी हाज़िरजवाबी से खुद को बचा लिया और शेर जैसे शक्तिशाली राजा को भी निरुत्तर कर दिया।
शेर की भूख और सियार का झाँसा
एक बार जंगल का राजा शेर बीमार पड़ गया। वह शिकार करने में असमर्थ था, इसलिए उसने अपने मंत्री सियार को काम पर लगाया। सियार जानता था कि कोई भी जानवर मौत के मुँह में खुद नहीं आएगा। उसने अपनी नज़र एक गधे पर टिकाई और उसे 'राजसी मंत्री' बनाने का लालच देकर शेर की गुफा तक ले आया।
जैसे ही गधा गुफा में पहुँचा, भूखे शेर ने उसका काम तमाम कर दिया।
सियार की 'दावत' और शेर का सवाल
शेर शिकार को वहीं छोड़कर नहाने चला गया। पीछे से सियार, जो खुद बहुत भूखा था, गधे का दिमाग (भेजा) चट कर गया। जब शेर वापस आया और खाने बैठा, तो उसे गधे के सिर में दिमाग नहीं मिला।
शेर ने दहाड़ते हुए पूछा— "सियार! इस गधे का दिमाग कहाँ गया?"
एक लाजवाब उत्तर
सियार ने बड़ी मासूमियत से मुस्कुराते हुए कहा—
"महाराज! आप भी कैसी बात करते हैं? अगर इस बेचारे के पास थोड़ा भी दिमाग होता, तो क्या यह खुद चलकर आपकी गुफा में आता? गधे के पास दिमाग होता ही नहीं है, इसीलिए तो वह गधा है!"
शेर सियार के इस तर्क को मान गया और चुपचाप अपना भोजन करने लगा। सियार की धूर्तता ने उसे न केवल एक स्वादिष्ट हिस्सा दिलाया, बल्कि शेर के गुस्से से भी बचा लिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"धूर्त अपनी चालाकी से कभी नहीं चूकता।"
भावार्थ: चालाक लोग अपनी गलतियों को छिपाने के लिए ऐसे तर्क देते हैं कि सुनने वाला भी चकित रह जाए। साथ ही, यह कहानी हमें आगाह करती है कि बिना सोचे-समझे किसी के प्रलोभन (Lust/Greed) में नहीं आना चाहिए, वरना गधे जैसा हाल हो सकता है।
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