मूर्ख गधा: ईर्ष्या और नकल का बुरा अंजाम
क्या दूसरों की तरह बनने की कोशिश करना हमेशा सही होता है? यह कहानी एक ऐसे गधे की है जिसने ईर्ष्या में आकर अपनी पहचान खोनी चाही, और बदले में उसे प्यार नहीं बल्कि डंडे मिले।
दो सेवक और दो अलग जीवन
एक कुम्हार के पास दो जानवर थे—एक गधा और एक कुत्ता। कुत्ता घर की रखवाली करता था और अजनबियों पर भौंकता था, जबकि गधा दिन भर मिट्टी के भारी बर्तन और बोझ ढोता था।
गधे के मन में कुत्ते के प्रति कड़वाहट पैदा हो गई। उसने सोचा— "यह कुत्ता तो बड़े मजे में रहता है! बस पूँछ हिलाने और भौंकने पर इसे अच्छा खाना और मालिक का प्यार मिलता है। और एक मैं हूँ, जो दिन-भर मेहनत करता हूँ, फिर भी डंडे और बचा-खुचा खाना ही नसीब होता है।"
नकल करने की गलत योजना
गधे ने तय किया कि वह भी कुत्ते की तरह व्यवहार करेगा ताकि मालिक उसे भी प्यार करे। उसने कुत्ते को ध्यान से देखा और सोचा— "मालिक के घर आते ही कुत्ता पूँछ हिलाता है और अपने अगले पैर मालिक पर रख देता है। मैं भी ऐसा ही करूँगा!"
जैसे ही शाम को कुम्हार थका-हारा घर लौटा, गधा उत्साह में भरकर 'ढींचू-ढींचू' रेंकने लगा। वह भागकर मालिक के पास पहुँचा और अपने भारी-भरकम अगले पैर कुम्हार की जाँघों पर रख दिए।
परिणाम: प्यार की जगह प्रहार
कुम्हार गधे के इस व्यवहार से डर गया। उसे लगा कि शांत रहने वाला गधा अचानक पागल हो गया है और उस पर हमला कर रहा है। गधे का भारी शरीर कुम्हार को चोट पहुँचा सकता था। कुम्हार ने तुरंत अपना मोटा डंडा उठाया और गधे की ज़ोरदार पिटाई कर दी।
बेचारा गधा दर्द से कराहता हुआ अपनी जगह पर लौट गया। उसे समझ आ गया कि वह कुत्ता नहीं बन सकता और नकल करना उसे भारी पड़ा।
कहानी की सीख (The Moral)
"किसी से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए। हर किसी की अपनी जगह और अपनी खूबियाँ होती हैं। दूसरों की अंधी नकल करना अक्सर अपमान और कष्ट का कारण बनता है।"

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