The Four Fools: A Satirical Tale of the Golden Bird | Life Lesson


"चार मूर्ख - सोने के दाने देने वाली चिड़िया की यह कहानी हमें अवसर की पहचान करना सिखाती है। जानिए कैसे एक बहेलिए, राजा और रानी ने अपनी मूर्खता से अपनी किस्मत खो दी।"


चार मूर्ख: जब सोने की चिड़िया ने खुद सुनाई अपनी दास्ताँ

अक्सर लोग अपने पास मौजूद बेशकीमती चीज़ों की कद्र नहीं करते और उन्हें दूसरों के हवाले कर देते हैं। आइए जानते हैं जंगल की उस काली चिड़िया की कहानी, जिसकी चोंच से सोने के दाने झड़ते थे।


एक जादुई शुरुआत

घने जंगल के एक ऊँचे पेड़ पर एक अनोखी काली चिड़िया रहती थी। उस चिड़िया की विशेषता यह थी कि वह जब भी मधुर गीत गाती, उसकी चोंच से सोने के शुद्ध दाने झड़ते थे। एक दिन एक बहेलिए (शिकारी) की नजर उस पर पड़ी। उसने देखा कि चिड़िया गा रही है और नीचे सोने के दाने गिर रहे हैं।

बहेलिया खुशी से झूम उठा। उसने सोचा, "अगर यह चिड़िया मेरे पास हो, तो मुझे फिर कभी काम करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी!" उसने जाल फैलाया और चावल के दाने बिखेर दिए। लालच में आकर चिड़िया नीचे उतरी और जाल में फँस गई।

लालच से सम्मान तक का सफर

बहेलिया चिड़िया को घर ले आया। अब वह रोज़ गाना गाती और बहेलिया अमीर होता गया। लेकिन जल्द ही बहेलिए के मन में एक नया विचार आया। उसने सोचा कि धन तो बहुत है, अब थोड़ा नाम और सम्मान भी कमाना चाहिए। उसने चिड़िया के लिए सोने का पिंजरा बनवाया और उसे राजा को भेंट करने महल पहुँच गया।

राजा चिड़िया को पाकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसने बहेलिए को दरबार में ऊँचा पद और मान-सम्मान दिया। कुछ ही समय में राजा के पास सोने का बड़ा भंडार जमा हो गया।

रानी की नादानी और चिड़िया की आजादी

राजा ने सोचा कि यह अनमोल तोहफा रानी के पास होना चाहिए। उसने वह सोने का पिंजरा और चिड़िया रानी को दे दी। रानी, जो आभूषणों की शौकीन थी, उसने चिड़िया की कीमत नहीं समझी। उसने सोचा, "इस चिड़िया को पालने का क्या फायदा? इससे अच्छा तो यह सोने का पिंजरा है।"

रानी ने पिंजरा खोला और चिड़िया को आज़ाद कर दिया। उसने पिंजरा सुनार को देकर अपने लिए सुंदर गहने बनवाने का आदेश दे दिया।

चार मूर्खों का वह गाना

चिड़िया उड़कर वापस अपने जंगल पहुँच गई। अब वह हर सुबह एक नया गीत गाती थी, जिसमें वह चार लोगों को मूर्ख बताती थी:

पहला मूर्ख मैं खुद थी: जो दाने के लालच में आकर बहेलिए के जाल में फँस गई।

दूसरा मूर्ख वह बहेलिया था: जिसने घर आई लक्ष्मी (मुझ चिड़िया) को सम्मान के लालच में राजा को दे दिया।

तीसरा मूर्ख वह राजा था: जिसने अपने खजाने को बढ़ाने के बजाय मुझे रानी को सौंप दिया।

चौथी मूर्ख वह रानी थी: जिसने सोने के दाने देने वाली चिड़िया को उड़ा दिया और सिर्फ एक निर्जीव पिंजरे को कीमती समझा।


कहानी की सीख (The Moral)

"ज्ञान और अवसर हर किसी के पास आते हैं, लेकिन जो व्यक्ति उनकी असली कीमत नहीं पहचानता, वह अंत में हाथ मलता रह जाता है। अपने पास मौजूद संसाधनों की कद्र करना ही असली बुद्धिमानी है।"

🌟 कहानी का अंत
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