"फलवाला और पंसारी - क्या चूहे लोहे का तराजू खा सकते हैं? पढ़िए यह चतुराई भरी कहानी कि कैसे एक फलवाले ने बेईमान पंसारी को उसी की भाषा में सबक सिखाया।"
फलवाला और पंसारी: जैसे को तैसा की एक अनूठी कहानी
क्या आपने कभी सुना है कि चूहे लोहे का तराजू खा सकते हैं? या कोई सारस एक पूरे इंसान के बच्चे को उड़ा ले जा सकता है? आइए जानते हैं इस मजेदार और सबक सिखाने वाली कहानी में।
पंसारी की बेईमानी
एक बार एक पंसारी ने अपने पड़ोसी फलवाले से उसका तराजू और बाँट उधार लिए। कुछ दिनों बाद जब फलवाले ने अपनी चीज़ें वापस माँगीं, तो पंसारी के मन में लालच आ गया। उसने बड़े मासूम बनकर कहा— "अरे भाई! मैं तो तुम्हें तराजू लौटा देता, लेकिन क्या बताऊं, उन्हें तो मेरे घर के चूहे खा गए! अब जो चीज़ चूहों के पेट में चली गई, उसे मैं कैसे वापस करूँ?"
फलवाले की शांत चाल
फलवाला समझ गया कि पंसारी झूठ बोल रहा है और बेईमानी पर उतर आया है। उसने गुस्सा करने के बजाय शांति से काम लिया। उसने कहा— "कोई बात नहीं मित्र! इसमें तुम्हारा क्या दोष? चूहों का तो काम ही कुतरना है। शायद मेरी तकदीर ही खराब थी।"
कुछ दिनों बाद, फलवाले ने पंसारी से कहा— "मैं कुछ जरूरी सामान लेने पास के शहर जा रहा हूँ। तुम चाहो तो अपने बेटे को मेरे साथ भेज दो, वह भी शहर घूम लेगा। हम कल तक वापस आ जाएंगे।" पंसारी ने खुशी-खुशी अपने बेटे को उसके साथ भेज दिया।
सारस और पहेली
अगले दिन जब फलवाला वापस लौटा, तो वह अकेला था। पंसारी ने घबराकर पूछा— "अरे! मेरा बेटा कहाँ है? वह तुम्हारे साथ क्यों नहीं लौटा?"
फलवाले ने बड़ी गंभीरता से जवाब दिया— "क्या बताऊं दोस्त, रास्ते में एक बड़ा सा सारस आया और तुम्हारे बेटे को उठाकर आसमान में ले उड़ा! मैं चाहकर भी उसे बचा नहीं पाया।"
पंसारी आगबबूला होकर चिल्लाया— "झूठ मत बोलो! भला एक सारस इतने बड़े लड़के को कैसे उठा सकता है? तुम पागल हो गए हो या मुझे बेवकूफ समझ रहे हो?"
न्याय का तराजू
फलवाले ने मुस्कुराते हुए पहेली सुलझाई— "भाई! अगर इस दुनिया में चूहे लोहे का तराजू और बाँट खा सकते हैं, तो उसी दुनिया में एक सारस भी किसी लड़के को उड़ा ले जा सकता है। अब तुम ही बताओ, क्या सच है और क्या झूठ?"
पंसारी को अपनी गलती का अहसास तुरंत हो गया। उसे समझ आ गया कि फलवाले ने उसे उसी की भाषा में सबक सिखाया है। उसने रोते हुए अपनी बेईमानी स्वीकार की, फलवाले का तराजू वापस लौटाया और माफी माँगी। फलवाले ने भी पंसारी के बेटे को सुरक्षित उसके घर पहुँचा दिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"जैसा करोगे, वैसा भरोगे। जो दूसरों के साथ छल करता है, उसे देर-सवेर उसी छल का शिकार होना पड़ता है। सच्चाई और ईमानदारी ही सबसे बड़ा धर्म है।"
0 Comments