"चालाक लोमड़ी और कौआ - क्या झूठी तारीफ जानलेवा हो सकती है? पढ़िए पंचतंत्र की यह प्रसिद्ध कहानी और जानिए क्यों हमें चापलूसों से सतर्क रहना चाहिए।"
चालाक लोमड़ी और मूर्ख कौआ: चापलूसी का कड़वा फल
क्या कभी किसी की मीठी बातों ने आपको मुसीबत में डाला है? यह कहानी एक ऐसे कौए की है जिसने अपनी तारीफ के नशे में आकर अपना ही नुकसान कर लिया।
एक झपट्टा और हाथ लगी रोटी
दोपहर का समय था, एक कौए ने बड़ी फुर्ती से एक बच्चे के हाथ से रोटी का टुकड़ा छीना और उड़कर एक ऊँचे पेड़ की घनी डाल पर जा बैठा। कौआ बहुत खुश था और आराम से अपनी जीत का स्वाद चखना चाहता था।
तभी वहाँ से एक भूखी लोमड़ी गुजरी। जैसे ही उसकी नजर कौए की चोंच में दबी उस ताज़ा रोटी पर पड़ी, उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा— "रोटी तो कौए के पास है, और मैं पेड़ पर चढ़ नहीं सकती। क्यों न इसे अपनी बातों के जाल में फँसाया जाए?"
झूठी तारीफ का जाल
लोमड़ी पेड़ के नीचे खड़ी हो गई और बड़े ही आदर से बोली— "कौआ राजा, सादर प्रणाम! कैसे हैं आप? बहुत दिनों बाद आपके दर्शन हुए।"
कौआ सावधान था, उसने कोई जवाब नहीं दिया। लोमड़ी समझ गई कि थोड़ी और बड़ी चाल चलनी पड़ेगी। उसने अपनी आवाज़ में और मिठास घोलते हुए कहा:
"वाह कौआ जी! आज तो आप गजब ढा रहे हैं। आपके ये काले पंख कितने चमकदार और रेशमी हैं। आपका शरीर कितना सुगठित है! मैंने सुना है कि आपकी आवाज़ तो कोयल से भी मधुर है। अगर आप मुझे बस एक छोटा सा गीत सुना दें, तो मैं मान जाऊँगी कि आप ही पक्षियों के असली राजा हैं।"
अहंकार और अंजाम
मूर्ख कौआ अपनी तारीफ सुनकर फूलकर कुप्पा हो गया। उसे लगा कि वह वाकई में बहुत सुंदर है और उसका गला बहुत सुरीला है। खुद को 'पक्षियों का राजा' सिद्ध करने के जोश में वह भूल गया कि उसकी चोंच में रोटी दबी है।
जैसे ही कौए ने गाना गाने के लिए अपनी चोंच खोली— "काँव-काँव...", वैसे ही रोटी का टुकड़ा सीधे नीचे जमीन पर जा गिरा।
चतुर लोमड़ी तो इसी ताक में थी। उसने पलक झपकते ही रोटी उठाई और जंगल की ओर भाग गई। पीछे रह गया तो सिर्फ कौआ, जो अपनी मूर्खता पर पछता रहा था।
कहानी की सीख (The Moral)
"झूठी तारीफ करने वालों और चापलूसों से हमेशा सावधान रहना चाहिए। अपनी प्रशंसा सुनकर विवेक नहीं खोना चाहिए, क्योंकि स्वार्थी लोग अक्सर मीठी बातों का इस्तेमाल अपनी जरूरत पूरी करने के लिए करते हैं।"
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