"लालची कुत्ता - क्या दूसरों की चीज़ों पर नज़र डालना सही है? पढ़िए यह प्रसिद्ध कहानी कि कैसे एक कुत्ते ने लालच में आकर अपनी ही हड्डी गँवा दी।"
लालची कुत्ता: जब लालच ने छीनी अपनी ही रोटी
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे पास जो है, उसमें खुश न रहकर दूसरों की चीज़ों पर नज़र डालना हमें कितना भारी पड़ सकता है? आइए जानते हैं इस प्रसिद्ध कहानी से।
एक अनमोल खोज
एक समय की बात है, एक कुत्ते को कहीं से मांस वाली एक बड़ी और स्वादिष्ट हड्डी का टुकड़ा मिल गया। वह बहुत खुश हुआ और उसे एकांत में ले जाकर चूसने लगा। काफी देर तक आनंद लेने के बाद वह वहीं सो गया।
जब उसकी नींद खुली, तो उसे बहुत ज़ोरों की प्यास लगी। वह अपनी कीमती हड्डी को अकेला नहीं छोड़ना चाहता था, इसलिए उसने हड्डी को मुँह में दबाया और पानी की तलाश में नदी की ओर चल दिया।
पानी में दूसरा कुत्ता?
कुत्ता नदी के किनारे पहुँचा। जैसे ही वह पानी पीने के लिए नीचे झुका, उसे साफ पानी में अपनी ही परछाईं (छाया) दिखाई दी। मूर्ख कुत्ते को लगा कि पानी के अंदर कोई दूसरा कुत्ता खड़ा है, जिसके मुँह में भी एक बड़ी हड्डी है।
कुत्ते के मन में लालच आ गया। उसने सोचा— "अगर मैं इस कुत्ते को डराकर इसकी हड्डी भी छीन लूँ, तो मेरे पास दो हड्डियाँ हो जाएंगी और मुझे बहुत मज़ा आएगा।"
लालच का कड़वा नतीजा
अहंकार और लालच में डूबे कुत्ते ने बिना सोचे-समझे पानी वाले कुत्ते पर हमला करने का फैसला किया। जैसे ही उसने डराने के लिए अपना मुँह खोला और ज़ोर से "भौं-भौं" किया, वैसे ही उसके अपने मुँह की हड्डी नदी के गहरे पानी में जा गिरी।
परछाईं वाला कुत्ता और उसकी हड्डी भी तुरंत गायब हो गए। अब उस लालची कुत्ते के पास न तो वह दूसरी हड्डी थी और न ही उसकी अपनी। वह अपनी मूर्खता और लालच के कारण भूखा ही रह गया।
कहानी की सीख (The Moral)
"लालच का फल हमेशा बुरा होता है। जो हमारे पास है, उसमें संतोष न करना और दूसरों का हिस्सा छीनने की कोशिश करना अक्सर हमें अपना सब कुछ गंवा देने पर मजबूर कर देता है।"
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