"ग्वालिन और उसका सपना - क्या केवल सोचने से सफलता मिलती है? पढ़िए यह मजेदार कहानी कि कैसे ग्वालिन ने ख्यालों में खोकर अपना असली दूध भी गँवा दिया।"
ग्वालिन और उसका सपना: कल्पना के हवाई महल
क्या आपने कभी काम पूरा होने से पहले ही उसकी सफलता के सपने देखे हैं? यह कहानी एक ऐसी ग्वालिन की है, जिसने भविष्य की योजनाएँ तो बहुत शानदार बनाईं, लेकिन वर्तमान की सावधानी बरतना भूल गई।
दूध का घड़ा और सुनहरे सपने
एक समय की बात है, एक ग्वालिन ताज़ा दूध से भरा घड़ा अपने सिर पर रखकर बाज़ार की ओर जा रही थी। रास्ता लंबा था, इसलिए वह चलते-चलते ख्यालों की दुनिया में खो गई।
उसने मन ही मन हिसाब लगाया— "आज का दूध बहुत शुद्ध है, इसे बेचकर मुझे खूब सारे पैसे मिलेंगे। उन पैसों से मैं बहुत सारे अंडे खरीदूँगी। उन अंडों से ढेर सारी मुर्गियाँ निकलेंगी।"
सपनों की ऊँची उड़ान
ग्वालिन की कल्पना अब और आगे बढ़ी— "जब मुर्गियाँ बड़ी हो जाएंगी, तो मैं उन्हें बेचकर एक महंगी रेशमी साड़ी और सोने के गहने खरीदूँगी। उस साड़ी को पहनकर मैं किसी राजकुमारी जैसी सुंदर लगूँगी। गाँव के सभी रईस और अच्छे लड़के मेरे पास विवाह का प्रस्ताव लेकर आएँगे।"
वह खुद को एक दुल्हन के रूप में देखने लगी। उसने सोचा— "जब वे लड़के मुझसे शादी की मिन्नतें करेंगे, तो मैं बहुत नखरे दिखाऊँगी और अपना सिर झटकते हुए गर्व से कहूँगी— नहीं! मुझे शादी नहीं करनी!"
हकीकत का कड़वा घूँट
जैसे ही ग्वालिन ने 'नहीं' कहने के लिए अपना सिर ज़ोर से झटका, उसके सिर पर रखा दूध का घड़ा लड़खड़ाकर ज़मीन पर गिर पड़ा।
छपाक! सारा दूध मिट्टी में मिल गया। न दूध बचा, न पैसे मिले और न ही अंडे, मुर्गियाँ या रेशमी साड़ी। ग्वालिन का हवा में बनाया गया वह सुंदर महल पल भर में टूटकर बिखर गया। वह रास्ते के किनारे बैठकर रोने लगी, क्योंकि उसकी एक लापरवाही ने उसका वर्तमान और भविष्य दोनों बिगाड़ दिए थे।
कहानी की सीख (The Moral)
"हवा में महल बनाना अच्छा नहीं होता! काम शुरू करने से पहले ही उसकी सफलता के सपने देखना और वर्तमान के प्रति लापरवाह हो जाना केवल असफलता ही लाता है।"
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