घुमक्कड़ अमीर: घर की उपेक्षा का कड़वा फल
क्या दुनिया की सैर करना और प्रसिद्ध मीनारें देखना ही जीवन की सफलता है? यह कहानी एक ऐसे अमीर व्यक्ति की है जिसे विदेशों की सुंदरता तो याद रही, लेकिन वह अपने ही घर की सुरक्षा करना भूल गया।
शान और शौकत का दिखावा
एक बहुत ही समृद्ध व्यक्ति था जिसे यात्राओं का बड़ा शौक था। वह साल के अधिकांश महीने विदेशों में ही बिताता था। जब भी वह वापस आता, गाँव के युवाओं को घेर लेता और अपनी यात्राओं की डींगें मारता। वह अक्सर उनसे पूछता—
- "क्या तुमने पेरिस का एफिल टावर देखा है?"
- "क्या तुमने पिसा की झुकी मीनार या आगरा का ताजमहल देखा है?"
जब बेचारे युवक "नहीं" कहते, तो वह उनका मज़ाक उड़ाते हुए कहता, "तुम लोगों ने घर से बाहर कदम ही नहीं निकाला, तुम क्या जानो जीवन का आनंद क्या होता है!"
युवाओं की चतुराई और कबाड़ी की दुकान
अमीर आदमी के घमंड से तंग आकर एक दिन युवकों ने उसे चुनौती दी। उन्होंने कहा, "श्रीमान, आपने पूरी दुनिया देखी है, पर क्या कभी पास वाली गली में कबाड़ी की दुकान देखी है? चलिए, आज हम आपको वहाँ की सैर कराते हैं।"
अमीर आदमी हँसते हुए उनके साथ चल दिया। लेकिन जैसे ही उसने कबाड़ी की दुकान के भीतर कदम रखा, उसके होश उड़ गए। दुकान में रखी चीज़ों को देखकर वह चिल्ला उठा— "अरे! यह तो मेरे पूर्वजों का कीमती सामान है। यह बेशकीमती कालीन, झाड़-फानूस और पीतल के बर्तन यहाँ कैसे पहुँचे?"
आँखें खोल देने वाला जवाब
युवकों ने मुस्कुराते हुए कहा— "जनाब! आप दुनिया घूमने में इतने व्यस्त थे कि आपको पता ही नहीं चला कि पीछे से आपके नौकर और लालची लोग आपके घर को कैसे लूट रहे हैं। आप पेरिस और दिल्ली की मीनारों के नक्शे देख रहे थे, और यहाँ आपके पुरखों की गाढ़ी कमाई धूल में मिल रही है।"
अमीर आदमी को समझ आ गया कि घर की देखरेख के बिना बाहरी दुनिया की यात्राएँ केवल एक खोखला दिखावा हैं।
कहानी की सीख (The Moral)
"समुचित देखभाल न करने पर घर की संपत्ति जाते देर नहीं लगती। अपनी जड़ों और अपनी संपदा की रक्षा करना सबसे पहला कर्तव्य है।"

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