भेड़िया और मेमना: कुतर्क और क्रूरता की कहानी
क्या तर्क और सच्चाई किसी दुष्ट व्यक्ति का मन बदल सकते हैं? यह कहानी एक मासूम मेमने और एक चालाक भेड़िये की है, जहाँ सत्य की हार एक ज़ालिम के बहानों के सामने हो जाती है।
झरने का किनारा और भेड़िये का बहाना
एक बार एक नन्हा मेमना झरने के ठंडे पानी से अपनी प्यास बुझा रहा था। झरने के ऊपरी हिस्से पर एक भेड़िया भी खड़ा था। मेमने को देख भेड़िये के मुँह में पानी आ गया। वह उसे खाने का बहाना ढूँढने लगा।
भेड़िया चिल्लाकर बोला— "ऐ छोटे जीव! तुम मेरा पानी गंदा क्यों कर रहे हो? क्या तुम्हें दिखाई नहीं देता कि तुम्हारे कारण मैं मैला पानी पी रहा हूँ?"
मेमने का तर्क और भेड़िये का झूठ
मासूम मेमने ने बड़ी विनम्रता से जवाब दिया— "महाराज, ऐसा कैसे हो सकता है? पानी तो आपकी तरफ से बहकर मेरी ओर आ रहा है, तो मैं ऊपर की तरफ का पानी भला कैसे गंदा कर सकता हूँ?"
मेमने की बात तार्किक थी, लेकिन भेड़िये ने हार नहीं मानी। उसने दूसरा आरोप मढ़ा— "मुझे याद आया! तुम वही हो जिसने पिछले साल मुझे अपशब्द कहे थे।"
मेमना डरते हुए बोला— "सरकार, पिछले साल तो मेरा जन्म भी नहीं हुआ था, मैं तो अभी केवल कुछ महीनों का हूँ।"
अन्याय की पराकाष्ठा
जब भेड़िये का कोई भी तर्क काम नहीं आया, तो वह झेंपते हुए बोला— "अगर तुम नहीं थे, तो तुम्हारी माँ रही होगी! तुम सबका खानदान ही बुरा है।" यह कहते ही क्रूर भेड़िये ने मेमने पर हमला कर दिया और उसे अपना निवाला बना लिया।
कहानी की सीख (The Moral)
"खतरनाक लोगों की छाया से भी दूर रहना चाहिए।"
भावार्थ: जो व्यक्ति पहले से ही बुरा करने का मन बना चुका हो, उसके सामने तर्क या सफाई देना व्यर्थ है। ऐसे लोगों के साथ उलझने के बजाय उनसे दूरी बनाना ही जीवन की सुरक्षा के लिए बेहतर है।

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